Tuesday, May 26, 2009

खेल खेल में भैया से चुदवाया

मुझे चुदाये हुए काफ़ी दिन हो गये थे। मेरा निशाना अब मेरा भाई था। अचानक ही वो मुझे सेक्सी लगने लगा था। घर पर पज़ामें में उसका झूलता लण्ड मुझे उसकी ओर आकर्षित करता था। उसे छुप कर नहाते हुए देखना मेरी आदत बन गई थी। जब कभी वो बाहर पेशाब करता था तो खिड़की से झांक कर मै उसका लण्ड देखा करती थी। वो भी मेरी नजरें पहचानने लग गया था। पर उसकी हिम्मत नहीं होती थी। वो भी मुझे नहाते हुए देखने की कोशिश करता था, उसमें मैं उसकी सहायता भी करती थी। हमेशा ऐसी जगह खड़ी हो जाती थी कि वो आराम से देख सके। आज हम दोनों एक दूसरे पर जाल डालने की कोशिश कर रहे थे। जब दो दिल राजी तो क्या करेगा काजी।
हम दोनों बिस्तर पर रज़ाई डाले बैठे थे। अपने मोबाईल से खेल रहे थे। राहुल अपने दोस्तों की तस्वीरें दिखा रहा था। इतने में एक फोटो नंगी सी लगी।
"ये कौन है राहुल ... ?
" ये मैं हूँ ... देख मेरी बॉडी ... है ना सॉलिड ... !" उसने अपनी तारीफ़ की।
मैंने अंडरवियर की तरफ़ इशारा करके उसे छेड़ा,"और ये डंडा जैसा क्या है ... ?"
"चल हट ... ये तो सबके होता है ... " उसने झेंपते हुए कहा।
"पर इतना बड़ा ... "
"है तो मैं क्या करूं ... "
"ऐ ... मुझे बता ना कैसा होता है ये ... " मैंने उसे उकसाया।
"शरम आती है ... अच्छा पहले तू बता ... " राहुल ने शरमा कर कहा।
"हट रे ... लड़कियों के ये डन्डा नहीं होता है ... " मुझे सनसनी सी हुई।
"तो मुझे दिखा तो सही ... तेरे होता है, तू झूठ बोलती है ... "
उसने मेरी चूत पर हाथ मारा ... और हाथ फ़ेर कर बोला "अरे हां यार ... ये कैसे ... " मुझे जैसे बिजली का करंट दौड़ गया।
मेरा मुँह लाल हो गया। पर मैंने कोई रिएक्शन नहीं दिखाया।
"तेरे पास तो है ना ... " मैंने उसके लण्ड पर हाथ फ़ेरा। उसका लण्ड खड़ा हो गया था। वो भी एक बार कांप गया। उसने और फोटो निकाले।
"ये देख ... ये मेरा डन्डा है और ये देख ये रोहित का है ... "
राहुल बताता जा रहा था, मेरे मन में खलबली मच रही थी।
इतने में मम्मी ने खाने के लिये आवाज लगाई ... "क्या कर रहे तुम दोनों ... चलो अब !"
हम दोनो रज़ाई में से निकल कर भागे ... "खाने के बाद और दिखाऊंगा ... !"
खाना खा कर हमने फिर से टीवी लगा दिया।
"हम सोने जा रहे हैं !"
" ... बत्ती बन्द करके सोना ... " कह कर मां ने अपना कमरा बन्द कर दिया।
हमने अपना कार्यक्रम जारी रखा।
हमने रज़ाई अब एक तरफ़ रख दी थी। उसका खड़ा हुआ लण्ड साफ़ दिख रहा था। उसने जानबूझ कर के अपना लण्ड नहीं छुपाया था। उसका मन था कि मैं उसका लण्ड पकड़ कर मसल डालूँ । मुझे सब पता था फिर भी राहुल को उकसाने के लिये मैंने भोलेपन का सहारा लिया।
"मैंने उसका लण्ड को छू कर कहा - "भैया ... इसे क्या कहते हैं ... ?"
"ये तो सू सू है ... !"
"नहीं ... और क्या कहते है ...? "
"वो ... देख गुस्सा नहीं होना ... इसे लण्ड कहते हैं !"
"हाय रे ... लण्ड ... ये तो गाली होती है ना ... और मेरी इसको ...? "
उसने मेरी चूत को छू कर और इस बार हल्का सा दबा कर कर कहा ... "इसको तो चूत कहते हैं ... "
चूत छूते ही मेरे जिस्म में एक बार फिर से करण्ट दौड़ गया। मुझे इच्छा हुई कि साली को जोर से दबा दे।
"हाय रे ... चूत इसे कहते हैं ... और ये ... " मैंने बोबे की तरफ़ इशारा किया।
"उसने मेरे चूचक पर अपना हाथ रखते हुए और थोड़ा सा दबाते हुए कहा ... "ये इसे चूंची कहते हैं ... "
वो जान कर मेरे अंगों को दबा दबा कर बता रहा था। मेरे शरीर में वासना दौड़ने लगी थी। राहुल का भी लण्ड फ़ड़फ़ड़ा रहा था। साफ़ ही दिख रहा था। मुझसे रहा नहीं गया। उसे हल्के से दबा ही दिया। राहुल सिसक पड़ा।
"बड़ा प्यारा है ना ... !"
"नेहा अपनी चूंची दिखा ना ...!"
"नहीं पहले तू अपना लण्ड दिखा ... !"
' दीदी शरम आती है ... अच्छा और हाथ से दबा ले ... !"
"ठीक है ... " मैंने उसका फिर से लण्ड पकड लिया ... और दबाने लगी। लण्ड दबाते हुये मेरे जिस्म में सनसनी फ़ैल गई। वो हाय हाय करने लगा।
"नेहा कितना मजा आता है ना ...! "
"बस कर ना ... अब तू चूंची दिखा।"
"नहीं तू भी हाथ लगा कर देख ले ... " उसने भी हाथ क्या रखा ... मेरे बोबे दबा ही डाले। मैं सिसक उठी।
"देख अब तो लण्ड दिखा ही दे ना प्लीज॥ ... " राहुल भी तो यही चाहता था कि कुछ और आगे बात बढ़े। उसने अपना पजामा नीचे उतार दिया और अपना कड़कता हुआ लण्ड बाहर निकाल दिया।
मेरी तो आह निकल गई। मन मचल गया।
"पकड़ लूँ ... ?" और उसके लण्ड को पकड़ लिया। एकदम गरम लोहे जैसा सख्त।
"अब तू अपनी चूत बता ... !"
"धत्त ... नहीं रे ... !"
"प्लीज बता दे, देख मैंने भी अपना लण्ड बताया ना ... "
मेरे शरीर में जैसे चींटियाँ रेंगने लगी। मैंने अपना स्कर्ट उंचा कर दिया। मुझे ऐसा करने असीम आनन्द आने लगा। शरीर में सनसनी फ़ैलने लगी।
"पांव फ़ैला ना।" मैंने शरमाते हुए अपने पांव फ़ैला दिए। मेरी चूत की दो फ़ाकें और बीच में एक छेद ...
"हाथ लगा दूँ ... !" उसने अपनी अंगुली मेरी चूत पर घुमाई और छेद में घुसा दी ... मैं तड़प उठी। और झट से उसका हाथ हटा दिया पर सच में हटाना नहीं चाहती थी।
"चल बहुत हो गया ... अब सो जा ... बाकी कल करेंगे।" राहुल बत्ती बन्द करके आ गया और मेरे पास ही लेट गया।
"नेहा ... चूत में लण्ड कैसे जाता है ... तुझे पता है ... ?" अब मुझे मौका मिल ही गया। भैया को अब ज्यादा तड़पाना ठीक नही, मैंने सोचा अब चुदवाना ही ठीक है।
"नहीं रे ... तू कोशिश करेगा ... करके देख ... शायद लण्ड घुसेगा ही नहीं ... !" मुझे पता था, शायद उसे भी पता था ... कि घुसेगा कैसे नहीं।
"उसके लिये क्या करूँ ... कैसे घुसाऊँ ...? "
"ऐसा कर तू मेरे ऊपर आजा ... और लण्ड को चूत पर रख कर जोर लगा ... आजा ऊपर आजा ... और कोशिश करके देख ... !" मुझे सिरहन होने लगी थी ... कि ये चोद डालेगा ... !
वो नंगा तो था ही, मेरी टांगों के बीच में आ गया ... मेरा शरीर तो वासना के मारे कांप गया। अब लण्ड अन्दर घुसेगा ... इन्तज़ार था ... ।
उसने अपना लण्ड मेरी चूत पर रखा और जोर मारा। मेरी चूत तो पहले ही गीली हो चुकी थी। वो एकदम अन्दर घुस पड़ा। मैं तड़प उठी।
"पूरा नहीं गया है और जोर लगा !"
अब मेरे ऊपर लेट गया और जोर लगा कर लण्ड पूरा घुसा दिया।
"दीदी इसमें तो बहुत मजा आ रहा है ... !"
"हां ... राहुल ... मुझे भी मजा आ रहा है ... और कर ... अन्दर बाहर कर ... "
मैं तो पहले भी चुदवा चुकी थी ये तो एक बहाना था भैया को पटाने का।
उसने मुझे चोदना शुरु कर दिया।
"हाय रे दीदी ... क्या मस्त है ... खूब मजा आ रहा है ...!"
"भैया ... और धक्के मार ... जोर से मार ... लगा यार ... हाय ... बहुत मजा देता है रे तू तो ... !"
"दीदी ... " उसने जोश में मेरे बोबे मसलने चालू कर दिये।
उसके धक्के बढ़ते जा रहे थे ... मुझे जोर से जकड़ता भी जा रहा था। मैं आनन्द से निहाल हो रही थी। अब वो तेज और जल्दी जल्दी धक्के मार रहा था।
अचानक मुझे लगा कि मैं झड़ने वाली हूँ .... मुझे और चुदाई चाहिये थी पर अपने को रोक नहीं पाई। और झड़ने लगी ... इतने में राहुल भी मेरे से चिपट गया और उसके लण्ड ने माल उगल दिया। वो मेरे ऊपर ही पड़ गया।
"अरे हट ना राहुल ... ये क्या कर दिया तूने ...!"
"मुझे क्या पता ... अपन तो कोशिश कर रहे थे ना ... इसमें दीदी खूब ही मजा आता है ... और करें दीदी ...? "
"इसे चुदाई कहते हैं ... समझा ... और चोदेगा क्या ... ले आजा ... सुन पीछे भी तो एक छेद है ... उसमें इस बार कोशिश कर !" मैंने उसके लण्ड को मसलते हुए कहा।
"कहाँ दीदी गाण्ड के छेद में ...? "
" हां रे ... देख उसमें घुसता है या नहीं ... !" कुछ ही देर में वो फिर लोहे जैसा कड़क हो गया।
राहुल फिर एक बार और तैयार हो गया ... मैंने करवट लेकर अपनी चूतड़ को उसके लण्ड से सटा दिया। उसका लण्ड मेरी चूतड़ों की दरार को फ़ाड़ता हुआ गाण्ड के छेद से टकरा गया।
मैंने अपनी गाण्ड ढीली कर दी। उसने कोशिश करके लण्ड गाण्ड में घुसा ही डाला। फिर मेरे दोनों बोबे थाम कर दबा दिये। और नीचे जोर लगा दिया। लण्ड अन्दर सरकने लगा।
मुझे हल्का दर्द हुआ ... पर मजा तो आ रहा था ना। उसका लण्ड अब मेरी गाण्ड चोदने लगा। मुझे मजा आने लगा।
गाण्ड के तंग छेद को उसका लण्ड नहीं सह पाया। तेज घर्षण के कारण उसका वीर्य एक बार फिर से छूट पड़ा।
"हाय दीदी ... मजा आ गया ... ! तुझे मजा आ रहा है ...? "
"भैया ... तू तो मजे की खान है रे ... अपन रोज़ ही ऐसा करेंगे ... बोल ना ... !"
"दीदी ... हां रोज ही करेंगे ... ! खूब मजे करेंगे ... !"
"देख मम्मी पापा को नहीं बताना ... वरना पिटाई हो जायेगी ...!"
"अरे मरना थोड़े ही है ... !"
"और चोदना है क्या ???"
"हां दीदी ... खूब चोदूँगा तेरे को ....! जोर जोर से चोदूंगा ... !"
"ले आजा ... फ़िर से चढ़ जा मेरे ऊपर ... और चोद दे ... !"
राहुल फिर तैयार था ... ....
मैंने अपनी टांगें फिर चौड़ा दी ... फिर एक बार गरम गरम लोहा मेरी चूत में उतरने लगा ...
मेरे दिल की इच्छा पूरी होने लगी ... ... मैं भैया से उस रात खूब चुदी ... उसने मेरा सारा चुदाई का खुमार उतार दिया।
सुबह हमारे बदन टूट रहे थे ... पर हम दोनों फिर से रात का इन्तज़ार करने लगे ...

गर्लफ्रेंड के साथ पहली बार

मेरा नाम अरुण शर्मा है मैं रायपुर में रहता हूँ, मैं रायपुर एक साल पहले ही आया हूँ। इस से पहले मैं उड़ीसा में रहता था उड़ीसा में मेरी एक गर्लफ्रेंड है उसका नाम श्वेता है। मेरा उसके साथ पाँच साल से चक्कर है वो भी मुझे बहुत प्यार करती है। मैं आप को अपनी गर्लफ्रेंड की चुदाई के बारे में बताता हूँ।
बात एक साल पहले की है जब उसका मुझे फ़ोन आया, उसने कहा- जब से तुम गए हो मुझे तुमसे मिलने का बहुत मन कर रहा है तुम मुझ से मिलने आओ ना !
तो मैंने कहा ठीक है मैं रविवार को उड़ीसा आऊँगा, तुम मुझे मेरे दोस्त के घर पे मिलने आ जाना।
तो उसने हामी भर दी, "मैं तुम से दोपहर २:३० को मिलूँगी।"
मैंने कहा, "ठीक है।"
वो दोपहर ठीक २:३० को आ गई। मैंने उसे देखा, वो नीले रंग की टॉप और सफ़ेद रंग की स्कर्ट पहन कर आई थी। मैं तो उसे देखता ही रह गया, क्योंकि आज वो कुछ ज्यादा ही ख़ूबसूरत लग रही थी।
मैंने कहा अन्दर आ जाओ, वो अन्दर आई। वहाँ पर मेरा फ्रेंड भी था, उसने कहा, "अरुण मुझे ज़रा काम है, मैं २ घंटे में आता हूँ।" कह कर वो चला गया अब कमरे में सिर्फ़ मैं और श्वेता ही थे।
मैंने उससे कहा, "बैठो श्वेता, मैं तुम्हारे लिए कुछ खाने के लिए लाता हूँ," तो उसने कहा, "तुम यहाँ बैठो, मैं लेकर आती हूँ।"
पाँच मिनट के बाद वह चाय लेकर आई। चाय पीने के बाद मैं उसके पास जाकर बैठ गया और उसका हाथ पकड़ कर कहा, "जान, मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ।" उसने कहा, "जानती हूँ, तभी तो आई हूँ।"
फिर मैंने धीरे से उसके कान में कहा, "जान मैं तुम्हें किस करना चाहता हूँ," तो उसने कहा, "ठीक है, कर लो, लेकिन ज़्यादा कुछ नहीं करना" तो मैंने "ठीक है" कहते हुए उसके नाज़ुक होठों पर अपने होंठ रख दिए और किस करने लगा। वह मेरा पूरा साथ दे रही थी। तभी मैंने धीरे से अपना हाथ उसकी चूचियों पर रखा, तो उसने मेरा हाथ हटा दिया। मैंने फिर से अपना हाथ उसकी चूचियों पर रखा, अबकी बार उसने कुछ नहीं किया। मैं समझ गया वह गरम हो रही है।
अब मैंने अपना एक हाथ उसकी पैण्टी में डाल दिया, उसकी पैण्टी गीली थी। मैंने पूछा कि ये गीला क्यों है?
उसने कहा- तुम बस मुझे किस करो, इतने सवाल मत करो।
मैंने कहा, "जान मैं तुम्हारा शरीर देखना चाहता हूँ" तो उसने ना कर दिया। मैंने उसे मनाने की बहुत कोशिश की तब जाकर वह मानी, कहा, "सिर्फ देखना, कुछ करना नहीं।"
मैंने कहा- तेरी कसम, कुछ भी नहीं करूँगा। फिर मैंने उसकी टॉप उतारी, उसने नारंगी रंग की ब्रा पहन रखी थी। मैंने उसकी ब्रा भी उतारी, ब्रा खोलते ही उसकी चूची मेरे हाथ में आ गई। मैं उसकी चूचियों को किस करने लगा तो वह पागल होने लगी। फिर मैंने उसकी स्कर्ट भी उतार फेंकी
अब वह सिर्फ नारंगी रंग की पैण्टी में थी, मैंने धीरे से वो भी उतार दी। मैं पहली बार किसी लड़की की नंगी चूत के दर्शन कर रहा था। उसकी चूत में हल्के भूरे रंग के बाल थे। मैंने उसकी चूत पर जैसे ही हाथ रखा, वह सिटपिटा कर उछल पड़ी। फिर मैं उसे किस करने लगा, उसकी चूचियाँ दबाने लगा। वो पूरी तरह गरम हो चुकी थी। उसने कहा, "आज मुझे मत छोड़ो, आज जो करना है कर लो,"
तो मैंने कहा, "जान, तुमने ही तो मना किया है।"
इस पर वो बोली, "उस बात को भूल जाओ, सिर्फ मुझे याद रखो, और जो करना है कर लो।" उसकी बात खत्म होने से पहले ही मैंने उसकी चूत में अपनी एक उँगली डाल दी, वह चिहुँक उठी, "दर्द हो रहा है।"
तो मैंने कहा, "जान पहली बार ज़रा दर्द होता है तुम अगर मुझसे प्यार करती हो तो आज दर्द सहन करना ही पड़ेगा।"
उसने कहा, "ठीक है।"
फिर उसने मेरी शर्ट उतार दी और मेरी छाती पर चूमने लगी, और बाद में उसने मेरी पैन्ट भी उतार दी, लगे हाथ अण्डरवियर भी उतार दिया, "इतना बड़ा मैं कैसे लूँगी?"
मैने कहा "तू बस देखते जा, तुझे तो ये भी कम पड़ेगा।"
फिर मैंने उसे अपनी बाँहों में उठाया और पलंग पर ले जाकर उसे लिटा दिया और उसकी चूत को चाटने लगा, वो मदहोश हो रही थी, और चिल्ला रही थी, "अब चोद दो मुझे, घुसाओ ना जल्दी।"
मैंने कहा, "अभी नहीं, रानी, पहले तू मेरे लंड को तो मुँह मे ले।" उसने देर न करते हुए मेरा लंड अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगी। दस मिनट में मेरा माल निकल गया।
मैं उठा और जाकर अपने लंड पर तेल लगा कर आया और पलंग पर आकर बैठ गया, वो मेरे लंड से खेलने लगी। मैंने कहा, "अभी खेल ले, थोड़ी देर में तू रोएगी।"
उसने भोलेपन से पूछा, "क्यों रोऊँगी?"
मैंने कहा, "बस अभी पता चल जाएगा।" मैं उसकी पाँवों के बीच में आ गया और उसके दोनों पैरों को ऊपर उठा कर अपने कंधे पर रख लिया। मैंने अपने लंड का टोपा उसकी चूत के मुहाने पर रखा, जैसे ही घुसाने के लिए आगे बढ़ा तो बोली- दर्द हो रहा है।
मैंने अपने होंठ उसके होठों पर रखे, क्योंकि अब उसका मुँह बन्द था, मैंने एक ज़ोर का झटका मारा तो उसकी आँखों में आँसू भर आए, वो मुझे धक्का देने लगी।
अबकी बार मैंने और ज़ोर का झटका मारा तो मेरा पूरा का पूरा लंड उसकी चूत में घुसा गया, वो रो रही थी। मैं उसकी चूचियाँ दबाने लगा, वो मुझसे कह रही थी, प्लीज़ मुझे छोड़ दो। मैंने कहा, "आज करने दे दिया, फिर पता नहीं तुमसे कब मिलूँगा, कुछ तो तुम्हे याद रहना चाहिए।"
उसने कहा, "ठीक है, लेकिन धीरे-धीरे करो न," मैं बोला - ठीक है मेरी रानी, धीरे-धीरे करता हूँ। करीब पाँच मिनट तक मैं उसे धीरे-धीरे चोदता रहा, फिर उसने कहा, "अच्छा लग रहा है।"
उसे मज़ा आने लगा था। वह और ज़ोर से, और ज़ोर से कहकर चिल्ला रही थी। मैंने अपनी गति बढ़ाई, फिर भी वह ज़ोर से करो ! की रट लगा रही थी। मैंने कहा- हाँ जान और ज़ोर से करूँगा। फिर मैंने उसके दोनों पाँव उठाए और काफी तेज़ी से लंड को उसकी चूत के अन्दर-बाहर करने लगा और थोड़ी ही देर में मैंने अपना सारा माल उसकी चूत में डाल दिया।
उसने कहा, "यह क्या कर दिया, मैं तो गर्भवती हो जाऊँगी।"
मैंने कहा, "चिन्ता मत कर, मैं तेरे लिए ई-पिल ला दूँगा, उसे खा लेने से कुछ नहीं होगा।"
वो बोली, "ठीक है, शाम को ला देना।"
मैंने कहा, "मैं एक बार और भी करूँगा।" तो बोली, "नहीं आज लेट हो गया है।"
मैंने कहा, "एक बार और जान, मैं कल चला जाऊँगा।" आग्रह करने पर वह मान गई, बोली, "ठीक है, लेकिन जल्दी करना।"
मैंने भी कहा - "ठीक है।"
रानी को उस दिन मैंने ती बार चोदा और मैं जब भी उड़ीसा जाता हूँ, उसे ज़रूर चोदता हूँ। और मैंने किस प्रकार उसकी गाँड मारी, ये अगली कहानी में बताऊँगा।

भाई के दोस्त

भाई के दोस्त
Hello friends. I am 19 yrs old and my name is Mini. This is my story with my brother's friend Sheo, Vijay, Keshri and Hari. I hope you all enjoy this story very much. This was my first time and my first time was a gangbang. I am going to narrate this story in Hindi:
Main 18 saal ki ek dam gori chitti ladki hoon. Mera figure 34-24-34, bhoori aankhein, 5'' 5" height, long legs. Mere papa aur bhaiyaMumbai mein ek company mein kaam karte hain. Ye 2 month pahle ki baat hai. Mummy ko early morning job ke liye jana padta tha. Hamari maid servent hi hamare liye breakfast aur lunch banati thi. Dinner mummy hi banati thi. Mera B.Sc. first year ke exam khatam ho chuka tha. Main ab bilkul free thi. Mera bhaiya ka dost Sheo Mumbai se Delhi kuchh kam se aaya tha. Uske sath uske 3 friends bhi aye the. Vijay, Keshri aur Hari. Hum sab aapas mein bahut ghul mil gaye the. Hum sara din hasi majak karte rahte the.
Ek din achanak mummy ne kaha, "mujhe apni friends ke saath Kanpur jana hai." Sheo ne kaha, "chachi hum log nahin jayenge. Aap chali jao.Mini bhi hamare sath hi rah legi." Maine bhi kaha, "mummy mujhe nahinjana hai. Tum chali jao. Main yahin rahungi." Mummy ne kaha, "theek hai. Kamla bhi yahin tumhare pass rahegi." Maine kaha, "theek hai."Doosre din mummy 3 din ke liye Kanpur chali gayee. Us din maine red top aur black skirt pahan rakhi thi. Vijay ne mujhe dekha aur bola, "tum aaj bahut hi sexy lag rahi ho." Main hans padi. Maine dekha un sabki nazar meri chuchiyon par thi. Main thoda sharma gayee. Itne mein kamla ne kaha, "khana tayyar hai. Tum sab aa jao aur khana kha lo." Hum sab ne khana khaya. Khana khane ke baad Kamla ne kaha, "aaj mujhe ghar jaldi jana hai. Main raat ko aa kar khana bana dungi." Sheo ne kaha, "koi baat nahin hai. Raat ko hum log bazar ja rahe hain. Raat ka khana hum log bahar hi kha lenge. Tum subah aa jana." Kamla boli, "theek hai." Kamla chaligayee.
Main hairaan ho gayee aur Sheo ko dekhne lagi. Sheo bola, "ismein hairan hone ki koyee baat nahin hai. Aaj hum log khoob maze karenge." Ye kah kar Sheo hasne laga aur saath hi saath uske teeno dost bhi hasne lage.
Mujhe kuchh samajh mein nahin aa raha tha. Main apne room mein chali gayee aur apni books ko utha kar aalmari mein rakhne lagi. Mere peechhe Sheo mere room mein aa gaya aur books rakhne mein meri madad karne laga.
Main books rakh rahi thi. Wo bhi mere peechhe se aa kar books rakhne laga. Mujhe ehsaas hua ki koi cheez mere buttocks ko touch kar rahi hai.
Ye Sheo hi tha. Wo apna lund meri gaand se ghis raha tha. Mujhe uske lund ka sparsh andar se bahut achchha lag raha tha lekin maine show nahin hone diya. Sheo ne kaha ki hum log movie dekh rahe hain. Tum bhi hamare saath chal kar movie dekho. Main bhi movies ki bahut shukeen thi isliye main jhat se Sheo ke saath uske bedroom mein chali aayee. Keshri ne CD on kar di. Ye ek english blue film thi. Main blue film dekh kar ghabda gayee. Sheo ne mujhe apne pass aa kar baithne ko kaha lekin main bhag kar apne room mein chalee gayee.
Mere peechhe peechhe Vijay mere room mein aa gaya . Usne mujhe peechhe se pakad liya aur jor jor se mere boobs ko dabane laga. Main chilla uthi to usne mujhe 3-4 chapat mere gaal par mare aur mujhe utha ke Sheo ke bedroom mein le aaya aur bed pe lita diya. Maine phir uth kar bhagne ki koshish ki to Hari ne daud kar bedroom ka darwaza andar se lock kar diya aur chabhi Sheo ki taraf fenk di. Sheo ne mujh se kaha, "Mini, hamare saath tum sex ko enjoy karo. Agar nahin karogi to hum log karvana achchhi tarah se jante hain." Main dar ke mare buri tarah se kanp rahi thi. Hari ne mujhe wapas bed par kheech liya aur blue film on kar di.
Vijay apni shirt utar chuka tha. Keshri ne meri top nikal di. Vijay ne meri skirt ek jhatke se utar di. Ab main un sab ke samne sirf bra aur panty mein thi. Sheo, Keshri, Vijay aur Hari ab sirf underwears mein hi the.
Wo sabhi bed par aa gaye aur main unke beech leti huyee thi. Sheo ne mujhe pakad kar kiss karna shuru kar diya. Thodi der tak kiss karne ke baad usne meri bra ki hookes ko khol diya. Ab mere boobs ek dam azad ho gaye. Hari ne mere left boob ko bite karna shuru kar diya to Sheo mere right boob ko choosne laga. Main unse baar baar request kar rahi thi ki mujhe chhod do lekin un sab ne meri ek na suni. Mere bahut jyada zid karne par Vijay ne mere muh par ek thappad zad diya aur chup rahne ko kaha. Main bahut jyada dar gayee aur chup ho gayee. Keshri ne ek jhatke se meri panty nikal di.
Main ab ek dam nangi ho gayee. Keshri ne meri chut ko sahlana shuru kar diya. Vijay ne apna underwear utar diya. Vijay ka lund dekh kar to meri sansein hi ruk gayee. Usne kaha, "tumko mera ye lamba aur mota lund poora apni kunwari chut ke andar lena padega." Main aur dar gayee. Wo sabhi ek dam nange ho chuke the. Un sab ka lund ek se badh ek tha. Hari ne kaha ki sali aaj 4-4 lund teri chudayee karne ke liye betab hain.
Vijay ne apna lund mere muh me daal diya aur meri left boob ke saath khelne laga. Thodi hi der baad usne mere muh mein apna lund andar bahar karna shuru kar diya. Keshri kisi pagal kutte ki tarah meri chut ko chat raha tha. Main bhi ab josh mein aa gayee thi aur mujhe bhi maza aane laga tha. Hari aur Sheo ne mujhse apna lund sahlane ko kaha. Main un dono ka lund sahlane lagi. Udhar Vijay mere muh mein hi ek baar jhad chuka tha. Maine uska paani thookna chaha to usne mujhe thookne nahin diya aur bola tum ye sara paani pee jao. Maine dar ke mare uske lund ka sara paani pee liya. Sheo abhi bhi meri chuchiyon ko masal raha tha. Vijay ne apna lund mere muh se bahar nikala aur meri jeebh ko choosne laga. Main aur jyada garam ho gayee. Meri chut se pani nikal raha tha.
Tabhi Keshri ne kaha, "kaun sab se pahle Mini ko chodega." Hari ne kaha, "ye Sheo ke dost ki sister hai aur Sheo hi sab se pahle Mini ki kunwari chut ko chodega." Sheo mere pass aa gaya . Vijay ne mere left boob ko aur Hari ne mere right boob ko choosna shuru kar diya. Keshri apna lund mere muh mein dal kar andar bahar kar raha tha. Sheo ne meri chut ko chatna shuru kar diya. Main josh mein aa kar bolne lagi, "aahhhhh.... ohhhhhh..... god." Thodi der tak meri chut ko chatne ke baad Sheo ne apna 8" ka lund meri chut ke beech mein rakha aur andar dabana shurukiya.
Kunwari hone ki wajah se meri chut bahut hi tight thi. Sheo ne jaise hi thoda zor lagaya to mujhe bahut tez dard hua aur main chillane lagi.
Hari ne Sheo se kaha, "yaar zara dheere dheere dalo. Ye abhi kunwari hai aur iski chut bahut tight hai. Bahut dard ho raha hai Mini ko." Sheo ne ek halka sa dhakka mara to uska lund meri chut mein 1 inch andar chala gaya . Meri to cheekh hi nikal gayee. Mujhe lagta tha ki koi garam loha meri chut mein dal diya gaya ho.
Hari ne mere hothon ko apne honthon se jakad liya taki meri awaz na nikle. Sheo ne phir zor lagaya to uska lund 3 inch ander chala gaya . Mujhe bahut tez darad hone laga. Main chillana chahti thi lekin Hari ne apne hothon se mere hothon ko seal kar rakha tha isliye main chilla na saki. Main rone lagi aur meri aankhon se aansu bahne lage.
Sheo ne phir zor lagaya to laga ki meri jaan hi nikal jayegi. Uska lund 6" inch tak meri chut ke andar ghus chuka tha. Meri chut se khoon bhi nikal aaya. Sheo thodi der ruka raha aur phir usne achanak ek zordar dhakka mara. Mujhe bahut tez dard hua. Ye dard mujhse bardast nahin ho raha tha. Sheo ka 8" ka poora lund meri chut ke andar ja chuka tha kyon ki uski dono balls ko main apne gaand ke paas mahsoos kar rahi thi. Sheo ne mere boobs ko maslna shuru kar diya. Jab main kuchh shant huyee to usne apna lund dheere dheere andar bahar karna shuru kar diya. Main phir se chilla uthi. Aisa lag raha tha jaise koyee chaku se meri chut ko kaat raha ho.
Sheo ne kaha, "ghabdao mat. Abhi thodi der mein sab theek ho jayega aur tumko bhi khoob maza aayega." Sheo ne chudayee ki speed badha di to mujhe phir dard hone laga. Thodi der tak chudwane ke baad mera dard bhi kam ho gaya aur mujhe maza aane laga. Mere muh se ab sexy aawazein nikalne lagi. Mere andar ek dam aag si lag gayee. Maine Sheo ka sath dena shuru kar diya to Sheo ne bahut tezi ke saath meri chudayee shuru kar di.
Lagbhag 15 minute tak mujhe chodne ke baad Sheo chillaya, "ohhh..... Mini.... main aa..... rahaaaa..... hoon....." Main apna gaand utha utha kar Sheo se chudwa rahi thi. Maine kabhi kisi se chudwaya nahin tha isliye main uska matlab nahin samajh paayee. Tabhi meri chut mein uske lund se kuchh garam garam sa paani nikalne laga aur saath hi saath meri chut ne bhi usi tarah ka paani chhodna shuru kar diya. Mujhe ye paani nikalne se bahut hi jyada maza aa raha tha. Main ek dam satwein aasman par thi. Dher sara paani meri chut mein nikalne ke baad Sheo ne apna lund meri chut se bahar nikala aur hat gaya .
Main abhi sambhal bhi nahin payee thi ki Keshri ne meri chut mein ek jhatke se hi apna aadhe se jyada lund dal diya. Thoda sa dard hua lekin mujhe maza bhi bahut aaya. Keshri ne phir ek zordar dhakka mara aur apna sara lund meri chut ke ander ghusa diya. Keshri ne khoob tezi ke saath meri chudayee shuru kar di. Mujhe bahut maza aa raha tha aur main bhi uska saath dene lagi. Sheo mere boobs ko masal raha tha. Usne mujhe choomte hue kaha, "wah Mini, tu to bahut jaldi hi chudwana jaan gayee. Ab tujhe bhi is kaam mein maza aane laga." Udhar Vijay mere muh mein apna lund andar bahar kar raha tha. Keshri to meri garam garam chut ko chodte huye ek dam pagal sa ho raha tha aur poore takat ke saath bahut hi tezi se mujhe chod raha tha. Lagbhag 15 minute tak chodne ke baad wo jhad gaya lekin main abhi bhi garam thi. Uski chudayee ke dauran main 2 baar jhad chuki thi. Keshri ke hat jane ke baad Hari ne mujhe chodna shuru kar diya. Hari ka lund un sab ke mukable patla aur chota tha. Uska lund kewal 7" ka tha. Hari ne bhi zor zor se mujhe chodna shuru kar diya.
Main khoob maze le le kar us se chudwa rahi thi aur uska saath de rahi thi. Vijay mujhe kiss kar raha tha aur mere boobs ko masal raha tha.
Hari ne apni speed bahut tej kar di to main ek dam mast ho gayee aur apna cutad utha utha kar uska saath dene lagi. Lagbhag 10 minute tak hi chodne ke baad Hari meri chut ke andar hi jhad gaya . Hari se chudwane ke dauran main kewal 1 baar hi jhad payee.
Ab Vijay se chudwane ki baari thi. Vijay meri tangon ke beech aa gaya aur usne meri tangon ko phaila diya. Meri chut muh khol kar kar Vaijay ka lund dekh rahi thi ki usne apna khoob mota aur lamba lund meri chut ke muh par rakh diya. Usne meri kamar ko pakad kar jaise hi ek dhakka lagaya to mujhe bahut dard hone laga. Main phir se cheekh padi. Uska aadha lund abhi bhi bahar hi tha. Phir usne ek zor ka dhakka mara lekin phir bhi to uska poora lund meri chut mein nahin ghusa. Main dard se ek dam behal hone lagi. Sheo, Keshri aur Hari mere boobs ko masalne mein mast the. Vijay ne phir se meri chut mein apna poora lund dalne ki ek nakam koshish ki lekin uska lund meri chut mein nahin ghusa. Vijay ne mujhe bina lund nikale hi utha liya aur khud neeche let gaya . Main ab uske upar thi. Sheo, Keshri aur Hari ne mujhe zor se pakad kar Vijay ke lund par daba diya. Aisa karne se uska sara lund meri chut ke andar chala gaya aur main dard ke mare chillane lagi. Lekin un teeno ne mujhe upar niche karna shuru kar diya. Unke aisa karne se Vijay ka sara lund meri chut ke andar bahar hone laga.
Thodi der baad mera dard khatam ho gaya aur mujhe bahut maza aane laga.
Kuchh der tak isi tarah karne ke baad Vijay ne mujhe doggy style mein kar diya aur mujhe chodne laga. Wo mujhe bahut hi teji ke saath chod raha tha aur neeche se meri choochiyon ko masal raha tha. Main Vijay se chudwane mein sabse jyada maza le rahi thi. Vijay se chudwate huye mujhe lagbhag 30 minute ho chuke the aur main is dauran 4 baar jhad chuki thi aur wo tha ki jhadne ka naam hi nahin le raha tha. Lagbhag 15 minute
aur chodne ke baad wo meri chut mein hi jhad gaya aur saath hi saath main bhi 1 baar phir se jhad gayee. Main ek dam thak kar choor ho gayee thi. Vijay ne lund meri chut se bahar nikala aur main uske lund ko chatne lagi. Meri chut abhi bhi dard kar rahi thi. Maine Vijay ka lund chat chat kar ek dam saaf kar diya aur uske baad bathroom chali gayee.
Bathroom se aane ke baad hum sab nange hi aaram karne lage.
Shaam ke 4 baje main kitchen chaye banane gayee to Sheo mere peechhe aa gaya . Sheo ne mujhe kitchen mein hi doggy style mein kar diya aur meri chudayee karne laga. Is baar mujhe Sheo se chudwane mein bahut maza aa raha tha. Lagbhag 15 min baad Sheo meri chut mein hi jhad gaya . Itne mein Keshri bhi kitchen mein aa gaya aur usne bhi mujhe bina koi mauka diye chodna shuru kar diya. Mujhe bahut maza aa raha tha aur meri bhookh aur badh gayee. Lagbhag 20 minute tak chodne ke baad Keshri bhi meri chut mein hi jhad gaya . Ab tak main 3 baar jhad chuki thi ki tabhi wahan Hari aa gaya . Usne bhi meri chudayee shuru kar di. Usne bhi mujhe 25 minute tak choda aur meri chut mein hi jhad gaya . Main phir se 1 baar jhad gayee. Un teeno ke jaane ke baad maine chaye banayee aur kitchen se bahar aa gayee. Meri bhookh abhi shant nahin huyee thi. Chaye peene ke baad main Vijay ka lund choosne lagi. Thodi hi der mein uska lund poori
tarah se tan gaya .
Usne mujhe doggy style mein chodna shuru kar diya. Main khoob maze le le kar Vijay se chudwa rahi thi. Vijay ne mujhe lagbhag 45 minute tak choda aur jhad gaya . Vijay se chudwane ke dauran main 4 baar jhad chuki thi. Mummy ke aane tak maine un sab se lagbhag 45 baar chudwaya. Har baar ki chudayee ke baad meri bhookh badh jati thi lekin mummy ke aane ke baad ye sab band ho gaya . 5 din baad wo sabhi apne ghar wpas chale
gaye. Main aaj bhi wo din nahin bhula paati.

लंड नेहोली मनाई

लंड नेहोली मनाई
दोःतों मैं आपको मेरेजवानी की एक सच्ची घटना सुना रहा हूँ...येवािकया आज का नही है..उस
व�� की बात हैजब मैं कॉलेज मेपढता था..मेरेबड़ेभाई की शादी हो गई थी..मेरी उमर २१ साल
की थी..िदखानेमेशुरू सेही ःमाटर् था मेरा लंड ७.५ इंच का हैऔर उसका सुपाड़ा काफी मोटा है..
अब तक मैंनेिसफ़र् २ बार ही चुदाई की थी..और मैं अपनी भाभी को देख कर मूठ मार िलया करता
था...वैसेमैं मौके की तलाश मेथा की भाभी की रसीली और गदराई चूत मेकब मेरा मोटा लंड दाल
कर उसेफाड़ दंगू ा..क्युकी मेरेभाई का लंड िसफ़र् ५ इंच का और पतला सा हैयेमुझेमालूम था..
भाभी को मैंनेकई बार मेरेलंड की झलक िदखाई है..और उसकी आंखों मेमैंनेइस मोटेलंड से
चुदानेकी प्यास भी देखी है.. खैर येबात हैहोली की...भै��या भाभी के साथ पहली होली मनाने
अपनी ससुराल के गाँव चलेगए थे ..और उनका साला और उसकी बीवी अचानक हमारेघर आ
गए..उस व�� घर मेमैं माँऔर ��पताजी ही थे...मैं होली मेरंग खेलना पसंद नही करता..इसिलए मैं
छत पर बैठकर एक िकताब पढनेलगा..भी का साला..सुधीर और उसकी बीवी दोनों होली खेल रहे
थे..हमारेघर के सामनेबहुत बड़ा आँगन है..उसमेआस पड़ोस के लोग भी आए हुए थे..मैं ऊपर से
ही होली की मःती देख रहा था.. िफ़र मैं अपनी िकताब मेमगन हो गया...कुछ देर के बाद भाई के
सालेकी बीवी..िजसका नाम अनािमका है..वो मेरेपीछेसेआई और उसनेमेरेचहरेपर रंग लगा
िदया..मैंनेभी उसके हाथों सेरंग छीन िलया और उसके पीछेदौड़..वो बच नही पायी मैंनेउसे
पकड़ा और उसेपूरेरंग सेसराबोर कर िदया..इसी बीच मेरा हाथ उसकी चुिन्चयों पर लग गया
और वो दब भी गयी..लेिकन मेरा ��यान नही गया..उसके मंुह से..स.्.स.्.स.्.स.्स.्स.्स.्स.्स.् की
आवाज़ िनकली तब मैं समझा की क्या हो गया..मैं शरमा गया..उसनेबड़ी काितल नज़र सेमेरी
तरफ़ देखा..वो मेरी तरफ़ देखती हुई जानेलगी..लेिकन वो नीचेनही गई.. छत पर एक बाथरूम
है..जो की बहुत ही बड़ा है..उसमेबाथटब भी हैऔर पूरेआधुिनक तरीके सेबनाया गया है.वो उस
बाथरूम के पास गई और मुझेअपनेपास इशारेसेबुलाया..मैं भी उसके करीब गया..उसनेधीरेसे
कहा..जरा नीचेदेखो.. मैंनेदेखा...उसनेअपनी सलवार नीचेकर ली थी..और उसकी चूत की झांटे
िदख रही थी...बहुत बाल थेउसकी चूत पर..एकदम घनेकाले...मैं देखता रहा..और मेरेलंड
महाराज हरकत मेआ गए और मेरेपैजामेमेटेंट बना िदया..मैंनेअन्दर च��डी नही पहनी थी..लंड
क्या मानो बोफोसर् तोफ बन गया था..उसनेधीरेसेकहा संजुउऊ..अब सब कुछ मुझेही िसखाना
पड़ेगा क्या?..मैंनेउसेबाथरूम के अन्दर धकेला और दरवाजा बंद कर िदया ..उसेजोर सेमेरी
बांहों मेखीचा और उसके लाल होंठों पर मेरेहोंठ िचपका िदए..मैंनेउसेजो िकस िकया वो बहुत
लंबा था..उसनेभी अपनेहाथों सेमुझेजकड िलया ..मेरा लंड उसके पेट पर लग रहा था..उसका
बदन बहुत ही नरम था..उसकी कड़क चुिन्चंयाँमेरेसीनेमेदब रही थी..इतनेमेउसके पित की
आवाज़ आई... "अन्नूकहाँहो? नीचेचलो भाई." उसनेकहा.."आप चिलए मैं अभी आती हूँ.", वो
नीचेचला गया.तभी उसनेशावर चालूकर िदया और मेरेकपडेउतारनेलगी.. पैजामा खुलतेही
मेरा मोटा लंड उछल कर बाहर िनकल आया.. उसेदेखतेही अनािमका के मुंह सेिनकला.."बाप
रे.. िकतना लंबा है.." िफ़र उसेहाथ सेपकड़नेलगी जो उसकी हथेली मेनही आ रहा था.."इतना
मोटा..मैं तो मर जाउंगी.." िफ़र उसेसहलानेलगी..मैंनेभी उसके कपड़ेखोल िदए..उसनेसलवार
के नीचेपैंटी नही पहनी थी..उसके कमीज़ को मैंनेऊपर करके िनकाल िदया..और ॄा खुल नही रहा
था मैंनेउसके ःशेप तोड़ िदए..और घुन्डी को मसलनेलगा..वो भी कड़क हो कर तन गयी थी.मैंने
एक एक िनपल को मुंह मेलेकर चूसना शुरू कर िदया..वो मेरेलंड सेखेल रही थी...उसनेमेरा एक
हाथ अपनी चूत पर लेगई..ओह.. उसकी चूत पुरी गीली हो रही थी..और झांट के बाल भी िचप
िचपा रहेथे..मैंनेउन्ही के बीच उसकी चूत के दानेको ढूँढा और हाथ सेरगड़नेलगा..उसके मंुह
से..आअह..इश.स.्स.्स.्स.् उफ्फ्फ़..की आवाज़ िनकलनेलगी..वो मेरा िसर नीचेदबानेलगी..मैं
समझ गया की वो चूत चटवाना चाहती है..मैंनेउसेबाथटब के िकनारेपर पैर फैला कर
��बठाया...और मैं उसके अन्दर बैठ गया...उसके पैरों को मैंनेअपनेकंधेपर िलया...उसकी झांट के
बाल मुंह मेआनेलगे..तभी मुझेएक ��याल आया..मैं उठा..और उसेमैंनेपैर फैला के उसेबाथटब
के अन्दर िचत लेटनेके िलए कहा..उसनेपूंछा..क्या करोगे.., मैंनेकहा..तुम्हारी चूत को और
खूबसूरत बनाऊंगा. कहतेहुए मैंनेअपना शे��वंग िकट िनकाला िफ़र..उसमेसेकैं ची िनकाल कर
उसकी झांट को छोटी कर दी..अब उसकी चूत थोडी िदखनेलगी थी..लेिकन उसमेसेपानी टपक
रहा था..िफ़र मैंनेवहाँसाबुन लगाया और मेरेरेज़र सेउसके चूत को शेव करनेलगा..इस मेमेरा
हाथ उसके दानेसेलग रहा था..और उसकी चूत सेऔर पानी िनकल रहा था..पुरी तरह शेव करने
के बाद मैंनेउसेपानी सेसाफ िकया..उफ़.गुलाबी रंग की चूत..मेरेतो होंश उड़ गए..��बल्कुल िकसी
सोलह साल की लड़की की चूत लग रही थी..
मैं उसकी गुलाबी चूत को देखता ही रहा..उसनेपूंछा..क्या देख रहे?..तुम्हारी नशीली चूत को..लो
तुम भी देखो..और मैंनेउसेबड़ेआईनेके सामनेमुंह करनेको कहा...उसनेअपनेपैर अच्छेसे
फैला के देखा..और उसके मुंह सेभी िनकल गया..हाय इतनी सुंदर..येतो मेरेबचपन की चूत
है..अब मैंनेउसकी चूत पर हाथ फेरा..और दानेको सहलातेहुए गीलेचूत मेऊँगली डाली..वो
उछल पड़ी..आअह..उईई माँ..और िफ़र मैंनेउसेपैर फैला के ऊपर ��बठाया और उसकी चूत को
चूमा.. .उफ़..स.्स.्स.् .स.्स.् .आअह..चाटो ..जीभ अन्दर डालो..आअह..वो इतनी देर मेबहुत गरम
हो चुकी थी..और कहनेलगी संजूअब येलंड डाल दो...मत तड़पाओ मुझे..लेिकन मैं तो उसकी चूत
के झरनेका पानी पीनेमेमशगूल था..मैंनेउसेनही छोड़ा ..उसनेमेरेलंड को पकड़ िलया और
बोलनेलगी..संजू..तुमनेिकतनी लड़िकयों की चूत बरबाद की हैइस मूसल से..मैंनेकहा..िसफ़र् एक
को..उसनेकहा..िकतना सलोना प्यारा लंड है..लेिकन मुझेडर लग रहा है..मैंनेपूंछा क्यों? तुमने
सुधीर का लंड िलया हैना? उसनेकहा हाँलेिकन वो तो इसका आधा भी नही है.. येतो लंबा भी है
और बहुत मोटा है...कहतेहुए उसकी कमर िहलानेकी ःपीड बढ़ गई..आह संजू.. जू..जू ..मेरा मेरा
िनकल जाएगा..कहतेहुए उसनेचूत को मेरेमंुह पर सटा िदया और मेरा िसर पकड़ के दबाने
लगी..और उसकी चूत सेसचमुच झरनेजैसा पानी िनकल के मेरेमुंह मेिगरनेलगा..मेरा पूरा
चेहरा उसके पानी सेतरबतर हो गया..और वो एकदम ढीली हो गयी...मेरा िसर अपनी चूत से
उसनेहटाया..और मेरेलंड को देखनेलगी.. िफ़र "गप्प" सेउसेपाकर के मुंह मेिलया..उसके मुंह
मेमेरा सुपाड़ा भी नही पूरा जा रहा था..जीभ सेचाटनेलगी..मैंनेिफ़र सेउसकी चूिन्चयाँमसलना
शुरू कर िदया..और हलके सेचूत को सहलानेलगा...करीब दस िमिनट इसी तरह करनेके बाद
मैंनेउसेखड़ा कर िदया..वो दीवार पकड़ के पलट के खड़ी हों गई ..और अपनी चूत को पीछेकी
तरफ़ उभार िदया..मैंनेअब उसकी गोल गोल चूतड़ को देखा..और उसके बीच की खाई..ओह उसे
हाथ सेदबातेहुए फैलाया..ओअह..उसकी गांड का भूरेरंग का नरम नाज़ुक छेद..मेरा लंड तो और
मोटा हों गया जोश मे..मैंनेलंड को एक हाथ सेपकड़ा और उसकी गांड और चूत तक 5-6 बार
िफराया..वो कहनेलगी राजा मत तड़पाओ..मैं मर जाउंगी..
उसनेजैसेही ऐसा कहा मैंनेअपनेलंड को उसकी चूत के गुलाबी छेद पर िटकाया और उसकी
पतली कमर पकड़ के धीरेसेदबाया..उसके मुंह सेचीख िनकल गई..आह...ओह..माँ...मर
गई.इ.इ.ई.इ.ई. .िनकालो.. ओ.ओ.ओ.ओ संजू.उ.उ. इसेिनकालो..मैं मर जाउंगी..बहुत ददर् हो रहा
है..मार डाला...अभी िसफ़र् लंड का सुपाड़ा ही अन्दर गया था..और उसकी चूत के मुंह को खोलता
हुआ..फंस गया था.. चूत का मंुह फ़ैल गया था और मेरेलंड के सुपाड़ेको कस के जकड िलया
था..मैंनेकमर सेहाथ ऊपर लेजा के उसकी चुिन्चयों को पकड़ िकया और मसलनेलगा..लंड चूत
के मंुह मेफंसा हुआ था....मैंनेउसके पीछेसेचूमतेहुए अब एक जबरदःत धक्का लगाया मेरा लंड
पुरा अन्दर घुस गया और उसकी चूत सेखून की ��पचकारी िनकली.. और लंड को रंग िदया..वो
रोनेलगी वो बहुत जोर सेचीखी थी.. .आ ..आ..आ..आ. आ..आ..आ. .आ. आ.. आ.आह.....मर
गई.ई.ई. ई.ई.ई.ई.ई...संजय पूरा डाल िदया..िकतनेबेरहम हो..मैंनेकहा..तुम्हारी चूत को देख कर
मैं वैसेही बेकाबूहो चुका था..ओअह ..लेिकन मेरी चूत फट गई..खून की बूँद नीचेफशर् पर टपक
रही थी....उसकी चीख इतनी तेज थी..की बाहर सेउसके पित सुधीर की आवाज आई..क्या हुआ?
वो िकसी तरह सेबोली.."कुछ नही..नहातेहुए पैर िफसल गया मैं िगर गयी ." वो बोला.अभी
नहानेकी क्या जरुरत थी...बाद मेनहा लेती..उसनेकहा "आपको कुछ करना नही है..मुझेतो
मेहमानों को देखना हैऔर उनके िलए खाना भी बनाना है " सुधीर बोला "ठीक हैठीक सेनहा लो
लेिकन सम्हाल कर.." इतना कह कर वो चला गया..मैं िफ़र सेधक्के देनेलगा..उसका ददर् बढ़ रहा
था..लेिकन मैंनेअब बहुत हलके सेउसेचूमतेहुए और चंूची मसलतेहुए..धक्के चालूरखे.. िफ़र
उसका ददर् थोड़ा कम होनेलगा...उसनेभी पीछेकमर को लातेहुए लंड को अन्दर लेना शुरू
िकया..मैंनेधक्के की ःपीड बढ़ा दी..अब िसफ़र् सुपाड़ेको अन्दर रख कर पूरा लंड बाहर खींच कर
धक्के लगानेलगा.. उसके मंुह सेिससिकयाँिनकलनेलगी..स.्.स.्.स.्स.्स.्स.्स.्स.्.स.्.
आ..आ...आ...आ..उफ़...ओह संजय..आज मैंनेअसली चुदाई का मजा िलया है....उसनेभी अपनी
गांड जोर सेपीछेलातेहुए लंड को अन्दर लेना शुरू कर िदया..उसकी चूत पानी छोड़ रही
थी..िजससेअब मुझेलंड को अन्दर बाहर करनेमेज्यादा तकलीफ नही हो रही थी..मैंनेअब उसके
चूतडों को दोनों हाथ सेकस के पकड़ िलया था..और वो..आअह...आअह..और जोर से..फाड़ दो..और
अन्दर दो....मेरा िनकल रहा है...ओअह..आअह...इश..श.श.श..श. ...सी..सी..सी...सी..करतेहुए
उसनेदीवार पर िसर िटकाया और उसकी चूत नेबहुत सारा पानी िनकाल िदया..जो की बाथटब के
फशर् पर उसके खून के साथ टपक रहा था एक धार की शकल मे..अब उसनेमेरेलंड को बाहर
िनकालनेके िलए कहा...मुझसेबाथटब के ऊपर िकनारेपर बैठनेके िलए कहा..और िफ़र मेरे
जांघों के दोनों तरफ़ पैर फैलाकर खड़ी हो गई..आगेबढ़ी और मेरेलंड को हाथ सेपकड़ कर
देखा.."देखो कैसा लाल हो गया है..चूत फाड़ कर.." िफ़र उसेपकड़ कर अपनेचूत सेलगाया..िफ़र
लंड को अपनी चूत पर लगाके वो उसके ऊपर हलके सेबैठनेलगी.मैं भी पैर सीधेकर के बैठ
गया..उसकी चूत सेइतना पानी िनकल रहा था की मेरी जांघेगीली हो रही थी.. पानी मेरेजांघों पर
टपक रहा था..पूरा लंड अन्दर लेतेही वो बहुत तेजी सेमेरेलंड पर उछलनेलगी..उसकी चंुिचयाँ
उसकी इस हरकत सेउछल रही थी..मैंनेिनपल मेरेमुंह मेलेिलया और उसकी दोनों चुिन्चयों को
बेदद�� सेमसलनेलगा...उसके मंुह सेओह..हाय....आ. .संजू. .मेरे..राजा..बहुत मजा आ रहा
है...मेरी चूत आज धन्य हो गयी तुम्हारेलंड सेचुदकर..मैंनेउसकी गांड के नीचेहाथ लगाया और
मैं भी अब नीचेसेधक्के लगानेलगा..मेरा भी अब पानी िनकलनेवाला था..उसकी चूत सेपानी
िनकलनेसेबाथ रूम मेफच फच फच..फचा..फच्च..की आवाज़ गूंजनेलगी थी..वो िफ़र सेझड़ने
वाली थी..मुझसेिचपक गई थी वो... मैंनेकस के धक्के नीचेसेलगानेशुरू कर िदए..िफ़र भी
करीब बीस िमिनट के बाद मेरेलंड नेफौवारा छोड़ िदया..मैंनेउसेकस के िलपटा िलया था..और
मेरेसाथ वो िफ़र सेतीसरी बार झड़ गई..मैंनेउसकी चूत को लबालब भर िदया था..मेरा लंड अभी
भी उसकी चूत के अन्दर था..करीब दस िमिनट बाद वो उठी..मैंनेदेखा उसकी चूत की हालत बहुत
ख़राब हो चुकी थी..मुंह पूरा खुल गया था..उसनेअपनी सलवार सेअपनी चूत और मेरेलंड को
साफ िकया..चूत पर हाथ लगातेहुए उसके मंुह सेकराह िनकल गई..िफ़र भी उसनेसाफ िकया
और पानी सेधोया..िफ़र मेरेलंड को चूमा..और कपडेपहन कर बाहर िनकल गई..मैंनेदेखा पूरे
िदन वो अपनेपैर फैला के चल रही थी..मैं जब भी िकचेन मेजाता या कहींवो िमल जाती तो मैं
उसकी चूंची मसल देता या िफ़र गालों पर िकस कर देता..वो शमार् जाती थी..कभी उसकी चूत पर
हाथ लगा देता..वो आह.. कर उठती थी..मैं समझ गया उसकी चूत सूज गई है..
इसी तरह िदन भर छेड़खानी चलती रही..मैंनेधीरेसेउसके कान मेकहा..रानी..िदल नही
भरा..और मेरा खड़ा लंड पीछेसेउसकी गांड मेलगा िदया..वो िकचेन मेखाना बना रही थी..उसने
मेरेलंड पर अपनी गांड को दबाया और कहा..तुमनेमेरी चूत की जो हालत कर दी है....अभी भी
उसमेसेपानी िनकल रहा है..मैं पैंटी भी नही पहन पा रही हूँ...मुझेनंगी ही घूमना पड़ रहा है..और
बाल नही होनेसेऔर भी अजीब लग रहा है..,.मेरा लंड..येसुनकर और कड़क हो गया..जो उसने
भी महसूस िकया.. मैंनेसामनेहाथ लेजा कर उसकी चुंिचयों को पकड़ के मसल िदया..और
उसकी चूत पर हाथ लेजा कर दबाया..उसके मुंह सेआऊच..आह..संजू..ददर् है.., मैं और कुछ करता
तभी उसके पित सुधीर की आवाज़ आई..अन्नू..मुझेभूख लगी है.., हाँरुको..अभी लगाती हूँ
खाना.., और वो बडबडाई..इसेिसफ़र् पेट की भूख लगती है..पेट के नीचेकी कोई परवाह नही है..मैं
िकचेन सेबाहर िनकल आया..शाम को वो मेरेकमरेमेआई..और मैंनेउसेझपट के पकड़
िलया..और कस के चूमनेलगा...उसनेभी साथ िदया..मुझसेकहनेलगी..संजूआज रात मेतुम्हारे
इस कमरेमेमेरी चुदाई करना..मैंनेपूंछा "रात मेतो तुम सुधीर के साथ सोनेवाली हो.." उसने
कहा नही आज मैं उसेनीद की गोली दंगू ी या िफ़र ज्यादा दारु ��पला दंगू ी..िफ़र वो सुबह आठ बजे
सेपहलेनही उठेगा...िफ़र तुम रात भर मेरी चूत की चुदाई करना..उसकी इस बात सेमेरा लंड
िकसी मोटेऔर लंबेनाग जैसा फनफना गया..उसनेमेरेलंड को पुचकारा..और कहा..आज रात मे
तेरी पूरी प्यास बुझा दंगू ी.आज की रात धमाल चुदाई होगी..रात भर..पूरी रात रंगीन कर दंगू ी राजा
.मैंनेभी उसेचूमा और उसकी चंुची और गांड को मसला..रात मेउसनेसुधीर को दारू पीतेहुए
ज्यादा दारू ��पलादी..वो ��बना खाना खाए सोफे पर ही बेहोश हो गया..िफ़र मैंनेऔर अनािमका ने
उसेबेडरूम मेलेजा कर सुलाया..मेरेना और ��पताजी अपनेरूम मेपहलेही सो गए थेवो भी
थोडी देर अपनेपित के रूम मेरुकी..मैं अपनेरूम मेआ गया..मेरा लंड काबूमेनही था.. आज
उसकी मोटाई और लम्बाई कुछ ज्यादा ही लग रही थी..करीब 11 बजेवो मेरेकमरेमेआई..उस
समय तक सभी गहरी नींद मेथे..मेरा रूम ऊपर वालेमंिजल पर है.और मेरेरूम मेबाथरूम भी
है..िजसमेबाथटब इसिलए मुझेनीचेजानेकी जरुरत ही नही होती..वैसेसभी रूम मेबाथरूम है
इसिलए रात मेकोई अपनेरूम सेबाहर नही िनकलता मैंनेदेखा उसनेजींस पँन्ट और शटर् पहना
था..मैंनेपहली बार उसेइस सेस मेदेखा .. बहुत सेक्सी लग रही थी..आतेही वो मुझसेिलपट गई
और मुझेिकस करना शुरू कर िदया.. मैंनेभी उसेकस के अपनेसेिचपका िलया उसके पीठ और
गांड पर हाथ सेदबानेलगा..पूरेशरीर पर मैंनेहाथ फेरा..सहलाया .िफ़र मेरेहाथ उसके ःतनों पर
आ गए..उसके होंठ अभी भी मेरेहोंठो सेजुड़ेहुए थे...मैंनेउससेपंूछा .."रानी सुबह की चुदाई कैसी
थी"?उसनेकहा.."आज तुमनेमुझेजो सुख िदया उसके सपनेमैं जब सेजवान हुयी तब सेदेखती
थी..और उसी के िलए तो मैं िफ़र सेचुदवानेआयी हूँ...तुम्हारा येमोटा लडं ..आज इसनेमेरी सही
तरीके सेसील तोडी है..इतना खून तो मेरी सुहागरात की चुदाई मेभी नही िनकला था..मैंनेउसके
पूरेकपडेिनकाल िदए ..उसनेॄा और पैंटी नही पहनी थी..उसके गोरेगोरेचुंिचयों पर सुबह के
िनशान थेलाल रंग के..मैंनेउसके िनपल मुह मेभर िलए और अब उसकी ःतनों को बहुत ही
बेरहमी सेदबाया..वो कराह उठी..आह..धीरे..अभी भी ददर् है..राजा..मैंनेअनसुना िकया और िनपल
पर हलके सेकाट िलया. .उसके मुंह सेआउउच....उफ़...संजू..लेिकन उसनेमेरा िसर अपनेःतनों
के ऊपर जोर सेदबा िलया..मैंनेहलके सेजीभ सेिनपल और चुंिचयों को चाटा ..और उसकी
िचकनी चूत पर हाथ फेरा थोड़ा दबाया..उसके मुंह सेउईई.ई..ई..ई.ई.. ई..ई.. ..
ई...ई...ई.ई.ई.ई...ई..िनकल गया..मैंनेपंूछा क्या हुआ? उसनेकहा बहुत ददर् है..मैंनेअब उसके पेट
को िकस करनेलगा..जीभ सेचाटा ..मैंनेउसेबेड पर िलटाया..और उसके पेट पर हाथ से
सहलाया.. उसनेमेरी लुंगी खींच के खोल दी और लंड को अपनेहाथ मेलेिलया..और उसेिकस
करनेलगी..मैं उसकी चूत की तरफ़ मुंह लेगया..उसके गोरेगोरेजांघों को फैलाया..ओह..उसकी
चूत फूल गई थी,,और लाल लग रही थी..लेिकन उसका जूस बाहर िनकल रहा था..चूत का दाना भी
फुला हुआ था..और बाहर िसर िनकालेहुए था..पैरों को और फैलातेहुए मैंनेपहलेउसकी जांघों को
चूमा..चाटा. .िफ़र दानेको अंगूठेसेरगडा..वो मचलनेलगी.. अब मैंनेचूत की दरार को
फैलाया..ओअह..चूत का मुंह तो खुला था सुबह की चुदाई सेलेिकन 2-3 जगह सेवो कट गई
थी..और वहाँखून बाहर आ रहा था..मैंनेधीरेसेअपनी जीभ चूत मेडाली..और िफ़र उसके जूस को
चाटनेलगा..उसनेभी अब मेरेलंड को मुंह मेलेिलया..मैंनेउसेअपनेऊपर खीच िलया..उसनेपैर
मेरेिसर के दोनों तरफ़ फैला िदए..उसकी चूत मेरेमुंह के ठीक ऊपर आ गई..मैंनेचूत की फांक को
फैलातेहुए पूरी जीभ उसकी चूत मेडाल दी और गोल गोल घुमानेलगा..मेरेइस तरह चाटनेसे
उसनेचूत को मेरेमंुह पर दबातेहुए अपना पानी िनकाल िदया..उसकी चूत का पानी बहुत ही
ःवािद��, नमकीन और िचप िचपा था..मेरा पुरा चेहरा भर गया..वो जल्दी सेउठ कर बैठ गई..और
मेरेलंड के दोनों तरफ़ पैर फैला कर लंड को सहलानेलगी..िफ़र धीरेसेउसको अपनी चूत से
सताया..और रगड़नेलगी..मैंनेकहा इसेअन्दर लो..इसके ऊपर बैठो..उसनेकहा बहुत मोटा है..ददर्
होगा.मैंनेिसरहानेरखी हुई बीम की बोतल उसेिदया...उसनेमेरेलंड पर अच्छेसेलगाया..और
िफ़र उसके ऊपर बैठी..िसफ़र् सुपाड़ा ही उसनेअन्दर िलया और चीख पड़ी...ओह..माँ.मर
गई..ई.ई.ई.ई.ई..ई. लेिकन..मैं नही रुका और मैंनेनीचेसेधक्का िदया मेरा आधा लंड अन्दर हो
गया..उसेबहुत ददर् हुआ...वो मेरेसीनेपर लेट गयी..मैं उसेचूमनेलगा...मैं नीचेसेहलके हलके
धक्के लगा रहा था..उसकी चूत पानी छोड़ रही थी.. और इससेलंड को अन्दर जानेमी सहूिलयत
हो रही थी.उसके मंुह सेभी अब..आअह..ओअह. इश..हुश. .हुश..उफ़ की आवाज़ िनकल रही थी.....
मैंनेमौके का फायदा उठाया और उसकी गांड को कस के पकड़ के बहुत ही जोरदार झटका िदया
और पुरा लंड अन्दर कर िदया..वो िहल भी नही पाई..लेिकन बड़ेजोर सेिचल्लाई..संजू...क्या कर
िदया मर गयी. उफ्फ्फ्फ़. .इतना अन्दर..लेिकन थोडी देर के बाद वो ख़ुद अपनी गांड िहलातेहुए
मुझेचोदनेलगी उसके मंुह सेिससिकयाँऔर आँख सेआंसूिनकल रहेथे... . स.्स.्स.् स.्स.्.
हुश..हुश..हुश..आअहा..िकतना मजा आ रहा है..ओह संजय तुमनेमुझेमहसूस करवाया की असली
मदर् क्या होता है..क्या मदार्ना लंड है..मेरी चूत की तमन्ना पूरी हो गई आज.. और कमरेमी
फच्च..फचाक्क की आवाज़ गूंज रही थी क्युकी मैं भी नीचेसेझटके लगा रहा था...वो लेनही पा
रही थी..अभी भी ददर् हो रहा था..लेिकन चूत मी घुसेमूसल का मजा उसेरोके हुए था..और करीब ५
िमिनट मी ही उसनेचूत को लंड पर जोर जोर सेपटकना शुरू
िकया..और..हाय..हाय...हाय..ओह..माँ..मैं गयी. ई.ई...ई.ई. .. करतेहुए मुझसेजोर सेिलपट गयी
उसकी चुिन्चयाँमेरेसीनेसेदब रही थी..और चूत मी पूरा लंड घुसा हुआ था.. ..उसकी चूत का जूस
मेरेलंड सेबहता हुआ मेरी गोिटयों को गीला कर रहा था..और अब वो एकदम शांत हो गई थी..मैंने
उसेअपनेनीचेिलया..मेरा लंड उसकी चूत मेही था..उसेमैंनेपलंग के िकनारेपर खींचा..पैर नीचे
लटकाए. .मैं ख़ुद नीचेखड़ा हो गया..मैंनेदेखा मेरेलंड पर अब भी थोड़ेखून के दाग लगेहै..शायद
उसकी चूत िफ़र िछल गई थी.. उसके पैर नीचेलटक रहेथेऔर कमर तक का नंगा बदन बेड पर
था.. उसकी मांसल जांघे..और उसके बीच चमचमाती चूत.. मेरी हालत तो दीवानेजैसी हो रही थी..
मैंनेउसके पैरों को फैलाया..उसकी चुिन्चयाँमसलेजानेसेलाल हो गई थी..होंठ भी चूमनेसेफूल
गए थेऔर िनचला होंठ तो एकदम लाल लग रहा था....येसब देख कर मेरा लंड और जोश मेआ
गया ..मैंनेउसके पैरों को हवा मेउठायेगांड ऊपर करके नीचेएक तिकया लगाया..िजससेचूत
ऊपर उठ गई और खुल गई...लंड को गांड और चूत पर सहलाया..िफ़र चूत के मुंह पर रखा..चूत
एकदम गीली थी.छेद पर रख कर मैंनेउसके िनपल मुंह मेिलए और कमर को दबाया. ".फःस"
की आवाज़ के साथ सुपाड़ा सिहत आधा लंड चूत मेसमांगया...अब मैंनेिनपल चूसतेहुए और
चंुची मसलतेहुए धीरेधीरेलंड को अन्दर डालना शुरू िकया ..थोड़ा सा बाकी था..मैं इतनेमेही
कमर िहला के उसेचोदनेलगा..करीब दस िमिनट ऐसा करनेके बाद वो भी नीचेसेकमर िहलाने
लगी...और िफ़र पैरों को मेरेकमर के पास ला कर कैं ची की तरह जकड िलया . .संजू..करो..और
करो.मार डाला तूनेसंजूऔर मार लेलेतेरी ही है..वो जोर जोर सेिचल्ला रही थी..मुझेडर लगा की
इसकी आवाज़ सुन कर कोई ऊपर ना आ जाए..मैंनेउसेइशारा िकया..लेिकन वो नही मानी..उसने
कहा तुम मुझेछोड़ो मेरेराजा..पहली बार िजंदगी मेचुदाई का मजा लेरही हूँ...मैंनेभी अब पूरा
लंड बाहर खींच कर एक रामपुरी झटका मारा और पूरा लंड जड़ तक उसकी चूत मेउतार
िदया..इससेवो दहल गई और उसका पूरा शरीर लरज़ गया , लेिकन इसी धक्के के साथ उसकी
चूत नेभी िफ़र सेपानी छोड़ िदया..इस बार काफी जोर सेउसका पानी िनकला िजसेमैंनेअपने
लंड पर गरम गरम महसूस िकया..मेरेधक्को की ःपीड बढ़ गई..मेरेधक्के सेउसके ःतन जोर
जोर सेिहल रहेथेऔर मैं दोनों हाथों सेउन्हें मसल रहा था..अब मेरेरुकनेका सवाल ही नही
था.करीब २५ िमिनट ऐसेही चोदनेके बाद मैंनेउससेकहाँ ..मेरी रानी..मेरा पानी िनकलनेवाला
है..आह..मैंनेउसेकस के पकड़ा कन्धों सेऔर लंड को जड़ तक घुसेड कर उसकी चूत मेमेरेलावे
का फौवारा छोड़ िदया..चूत पूरी भर गई..और वो भी इसकी गम�� और मेरे��पचकारी सेमेरेसाथ ही
िफ़र सेएक बार झड़ गई....हाय मेरेराजा.. कहतेहुए मुझसेिलपट गई...उसके बाद हम दोनों
बाथरूम मेगए ..एक दसू रेको साफ िकया..उसके बाद मैंनेउसेडौगी ःटाइल मेभी चोदा..रात के 3
बजेतक और 2 बार अच्छेसेचोदा..उसके बाद वो िकसी तरह अपनेपित के कमरेमेगई..उससे
चला भी नही जा रहा था.. मैंनेउसेिकसी तरह उठा के खड़ा िकया..चूत तो फूलकर एकदम डबल
रोटी बन गई थी..उसके बाद वो िजतनेिदन हमारेघर पर रही मैंनेउसेहर रात चोदा..िफ़र मेरे
भाभी और भै��या आ गए.. अगलेिदन वो अपनेपित के साथ चली गई..िफ़र उसनेमुझेएक पऽ
िलखा की वो मेरेबच्चेकी माँबननेवाली है..बच्चा होनेकी ख़बर सुनकर मैं उसके घर गया..उसी
व�� सुधीर को टूर पर मुम्बई जाना पड़ा ४ िदन के िलए..मैंनेिफ़र से४ िदन उसेिदन रात
चोदा..लौट के आनेके बाद भाभी की हरी झंडी िमल गई..असल मेभाभी के हाथ अनािमका का
..बच्चा होनेवाला पऽ लग गया था मेरेरूम से..उन्होंनेमुझसेपूंछा..मैंनेसब बताया..असल मेमैं
भी यही चाहता था..अब भाभी की चुदाई मैंनेउसी िदन दोपहर मेकी मेरेलंड को िफ़र खून की
��पचकारी का सामना करना पड़ा

िकःसा चुदाई िक रात का

िकःसा चुदाई िक रात का
िकःसा हैयेचुदाई िक रात का
उस रात मेरेमन में ना जानेक्या झमेला था
क्योंिक मैं घर पर एकदम अकेला था
अकेलेपन में मैं तन्हाई के गीत गुनगुना रहा था
और बीच बीच में अपनेलन्ड को भी िहला रहा था
क्योंिक िकसी कन्या क ख्याल आतेही येिदल बड़ा हो जाता है
येमासूम लन्ड भी इसकी तमन्ना समझतेहुए खुद ही खड़ा हो जाता है
अब हैतो खड़ा होगा ही
छोटा हैतो बड़ा होगा ही
अचानक मुझेलगा िक कोई बुदबुदा रहा है
िदमाग गंदा हो तो लगता हैिक कोइ चुदवा रहा है
मैनेदरवाजा खोला तो वहांएक गोरी थी
उसके मम्में और गान्ड देख कर लग रहा थी िक आज तक कोरी थी
मैनेउसेअपनेघर में अन्दर बुला िलया
ठंड बहुत थी सो मैनेकुन्डा लगा िदया
मैनेमाज़रा पूछा तो पता चला वो राःता भूल गयी
मेरी िहम्मत भी उसकी हालत देख के खुल गयी
मैनेउसेबाहों में भर िलया था
क्योंिक उसेचोदनेका पक्का इरादा कर िलया था
वो मेरी बांहों में आकर शरमा रही थी
और मेरी सांसों की गरमी सेवो भी गरम हुई जा रही थी
मैनेधीरेसेएक हाथ उसके मम्मों पर धर िदया
इन हाथों नेही उसका सारा काम कर िदया
मेरा दसू रा हाथ उसकी चूत पेथा
और धयान उसके सूट पेथा
आिखर उसकी जवानी को जो संवारना था
इसिलयेउसका सूट भी उतारना था
मैनें उसकी कमीज़ उतार कर मम्म दबानेशुरू कर िदये
सलवार को अलग िकया और शोट लगानेशुरू कर िदये
वो आहें भर कर मज़ा देरही थी
या यूंकहें िक लड़की होनेकी सज़ा लेरही थी
मेरा लन्ड उसकी चूत के अन्दर था
येभी मज़ का एक मंजर था
वो कह रही थी िक चोदतेरहो चोदतेरहो और चूत को फ़ाड़ डालो
आज अपनेलन्ड सेमेरी चूत में झण्डेगाड़ डालो
मैं भी पूरेदम सेउसेचोदेजा रहा था
और चूत चुदाई के इस खेल में दोनों को मज़ा आ रहा था
मेरेलन्ड सेपानी िनकला तो वो संतु�� हो गयी
नंगी ही वो मुझ्सेिलपट के सो गयी
थोड़ी देर बाद उसनेमेरेलन्ड को पकड़ िलया
मुझेकुछ समझ आता इससेपहलेही अपनेहोठों में जकड़ िलया
वो मेरेलन्ड को चूस रही थी इसिलयेलन्ड खड़ा हो गया
एक बार िफ़र सेयेलन्ड चुदाई के िलयेखड़ा हो गया
अब उसेअपनी गाण्ड मुझसेमरवानी थी
उसकी चूत िक तरह उसकी गाण्ड भी सुहानी थी
मैनेभी पूरी पावर सेअपना लन्ड उसकी गाण्ड में डाला
और एक ही बार में उसकी गाण्ड को फ़ाड़ डाला
उसकी चीख नेमुझेझन्झोड़ िदया
साथ ही मेरेलन्ड नेएक बार िफ़र पानी छोड़ िदया
अब मुझेपता चला मैं कहांथा
िजसमें मैं था वो एक दसू रा ही जहांथा
मैनेगाण्ड और चूत दोनो ही मारी थी
लेिकन यारो सच जो येहैिक मैनें सपनेमें मुठ मारी थी
मेरा अन्डरिवयर एकदम गीला हो गया था
मुठ इतनी जोर सेमारी िक लन्ड भी नीला हो गया था
यारो सपना ही सही लेिकन मज़ा तो िकया
अपनेलन्ड को चूत के अन्दर तो िकया
तो दोःतो ! चोदो, चुदाओ और अपनी लाइफ़ को खुशहाल बनाओ

सुनता की शादी का सफर

Story by - Devmukund Sagar
सभी दोस्तों को मेरा सादर प्रणाम और प्यारी भाभियों और कुंवारी !! चूत वालियों को मेरे लंड का प्रणाम. मैं आपको अपने जीवन की रास लीला सुनाने जा रहा हूँ । दोस्तों मैं देव इंडिया के दिल मध्य प्रदेश के सागर का रहने वाला हूँ. मेरी उमर ३८ साल रंग गोरा मजबूत कद-काठी और ६"४" लम्बा हूँ. मुझे मजलूम की मदद करने मैं बड़ी राहत मिलती है और नर्म दिल हूँ।

जैसा की अक्सर कहानियो में होता है कि कहानी का कैरेक्टर के ऑफिस की दोस्त या पड़ोसन या रिश्तेदार वाली कोई बुर (जिसको मैं प्यार से मुनिया कहता हूँ ) मिल जाती है उसे तुरन्त चोदने लगता है, पर हकीकत इससे कही अधिक जुदा और कड़वी होती है एक चूत चोदने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है ऐसी एक कोशिश की यह कहानी है।

हमारा शहर सागर प्राकृतिक सुन्दरता और हिल्स से घिरा हुआ है। यह एक बहुत ही सुंदर लैक है और यहां के लोग बहुत ही संतुष्ट और सीधे सादे हैं। पर यहां की महिलायें बहुत चुदक्कड़ है यह मैंने बहुत बाद में जाना। मैं क्रिकेट और फुटबॉल का नेशनल प्लेयर रहा हूँ इस कारण से अपने एरिया में बहुत मशहूर था और सुंदर कद काठी और रूप रंग गोरा होने के कारण हैंडसम भी दीखता था. लेकिन मुझे अपने लन्ड की प्यास किसी न किसी के बारे मैं सोच कर और अपनी मुट्ठ मार कर या अपना तकिये को चोदकर बुझानी पड़ती थी मैं अपनी हेल्पिंग हब्बिट्स के कारण भी बहुत मशहूर था और सभी मुझे प्यार भी इसीलिए बहुत करते थे।

मेरे घर के सामने ग्राउंड है जहा मैं खेलते हुए बड़ा हुआ और अपने सभी सपने सन्जोए। एक दिन हम कुछ दोस्त मोर्निंग एक्सर्साईज करके आ रहे थे तभी सामने से आती हुई ३ लड़कियों पर नज़र पड़ी। उनमे से दो को मैं चेहरे से तो जानता था कि वो मेरे घर के आस पास रहती है। तीसरी से बिल्कुल अनजान था और वो कोई ख़ास भी नहीं थी.... हम दोस्त अपनी बातों में मस्त दौड़ लगाते हुए जैसे ही उनके पास पहुचे तो बीच वाली लड़की मेरे को बहुत पसंद आई. मै सिर्फ़ बनियान और नेक्कर मैं था तो मेरे सारे मस्सल्स दिखाई दे रहे थे जिससे शायद वो थोडी इम्प्रेस हुई उसने भी मुझे भरपूर नज़र देखा. मेरा ध्यान उस लड़की पर लगा होने से मैं नीचे पत्थर नही देख पाया और ठोकर खाकर गिर पड़ा वो तीनो लड़कियां बहुत जोरों से हंस पड़ी और भाग गई. मुझे घुटनों और सर में बहुत चोट लगी थी काफ़ी खून बहा था इस कारण मै कुछ दिन अपनी मोर्निंग एक्सर्साईज के लिए दोस्तों के पास नही जा पाया.

ठंडों का मौसम चल रहा था हमारे मोहल्ले मैं एक शादी थी. मेरी हर किसी से अच्छी पटती थी इसलिए मेरे बहुत सारे दोस्त हुआ करते थे. उस शादी में मैं अपने ऊपर एक जिम्मेदार पड़ोसी की भूमिका निभाते हुए बहुत काम कर रहा था.... और मै जयादातर महिलाओं के आस पास मंडराता कि शायद कोई पट जाए या कोई लिंक मिल जाए मुनिया रानी को चोदने या दर्शन करने के। पर किस्मत ख़राब. कोई नही मिली. मुझ से किसी खनकती आवाज ने कहा " सुनिए आप तो बहुत अच्छे लग रहे है आप और बहुत मेहनत भी कर रहे है यहां "

मैंने जैसे ही मुड़कर देखा तो वो ही बीच वाली लड़की जिसको देखकर मै गिरा था और जिसके कारण मेरे सर पर अभी भी पट्टी बंधी हुई थी जिसमे ३ टाँके लगे हुए थे और घुटने का भी हाल कुछ अच्छा नही था... मैंने देखा वो खड़ी मुस्कुरा रही थी. मैंने कहा "आ आप ........ आपने मेरे से कुछ कहा"

" नही यहां ऐसे बहुत सारे लोग है जो मेरे को देख कर रोड पर गिरकर अपना सर फ़ुड़वा बैठे" वो अपनी सहेलियों से घिरी चहकती हुई बोली।

" आप लोग तो हंस कर भाग गई.... मेरे सर और पैर दोनों मैं बहुत चोट लगी थी" मैंने कहा

मेरे ही मोहल्ले की एक लड़की ज्योति जिसे मै पहले पटाने की कोशि्श कर चुका था पर वो पटी नहीं थी बल्कि मेरी उससे लडाई हो गई थी. ज्योति ने मेरे से मुह चिड़ाते हुए कहा इनको " च्च्च च्च छक ...... अरे!! अरे!! बेचारा..... देव भैया अभी तक कोई मिली नही तो अब लड़कियों को देख कर सड़कों पर गिरने लगे " और खिल खिला कर हंस दी .....

मैंने ज्योति के कई सपने देखे मै ज्योति को अपनी गाड़ी पर बिठाकर कही ले जा रहा हूँ उसके दूध मेरी पीठ से छु रहे है वो मेरे लंड को पकड़ कर मोटरसाईकिल पर पीछे बैठी है उसके बूब्स टच होने से मेरा लंड खड़ा हो जाता है तो मै धामोनी रोड के जंगल मै गाड़ी ले जाता हूँ जहा उसको गाड़ी से उतार कर अपने गले से लिपटा लेता हूँ उसके लिप्स, गर्दन बूब्स पर किस कर रहा हूँ और उसके मम्मे दबा रहा हूँ साथ ही साथ उसकी मुनिया(बुर) को भी मसल रहा हूँ वो पहले तो न नुकर करती है लेकिन जब मै उसकी मुनिया और बूब्स उसके कपडों के ऊपर से किस करता हूँ और उसकी सलवार खोल कर उसकी पैंटी के ऊपर से ही उसकी पेशाब को चाटने लगा ज्योति भी सीई हीई येः क्या कर रहे हो........ मैं जल रही हूँ मुझे कुछ हो रहा है ....... कह रही है और मै ज्योति को वहीं झाडियों मैं जमीन पर लिटाकर चोदने लगता हूं। पहले ज्योति का पानी छूटता है फिर मेरा.. जब ख्वाब पूरा हुआ तो देखा लंड मेरा मेरे हाथ मैं झड़ चुका है और मुट्ठी मारने से लंड लाल हो गया है

मुझे बहुत बुरा लगा ज्योति के तानों से मेरी बे-इज्ज़ती हुई थी वहां से मैंने इन दोनों को सबक सिखाने का ठान लिया. मैंने गुलाब जामुन का शीरा उसकी बैठने वाली सीट पर लगा दिया जिससे उसकी सफ़ेद ड्रेस ख़राब हो गई और वो ऐन मौके पर गन्दी ड्रेस पहने यहां वहां घूमती रही और लोग उसे कुछ न कुछ कहते रहे .... पर उसका चेहरा ज्यों का त्यों था .. मैंने ज्योति को उसके हाल पर छोड़ कर अपने टारगेट पर कन्स्न्ट्रेट करनाउचित समझा

मै उससे जान पहचान करना चाहता था जब से उसको देखा था उसके भी नाम की कई मूठ मारी जा चुकी थी और तकिये का कोना चोदा जा चुका था.. मेरा तकिये के कोने मेरे स्पेर्म्स के कारण कड़क होना शुरू हो गई थे. पर कोई लड़की अभीतक पटी नहीं थी.

इसबार मैंने हिम्मत करके उसका नाम पूछ लिया. जहा वो खाना खा रही थी वहीं चला गया और पूछा "आप क्या लेंगी और..... कुछ लाऊँ स्वीट्स या स्पेशल आइटम आपके लिए...

भीड़ बहुत थी उस शादी मैं वो मेरे पास आ गई और चुपचाप खड़ी होकर खाना खाने लगी. मैंने उसको पूछा "आप इस ड्रेस मैं बहुत सुंदर लग रही है.. मेरा नाम देव है आपका नाम जान सकता हूँ..." फिर भी चुप रही वो और एक बार बड़े तीखे नैन करके देखा. हलके से मुस्कुराते हुए बोली" अभी नही सिर्फ़ हाल चाल जानना था सो जान लिया"

मैंने उसका नाम वहीँ उसकी सहेलियों से पता कर लिया और उसका एड्रेस भी पता कर लिया था. उसका नाम मीनू था. वो मेरे घर के ही पास रहती थी. पंजाबी फॅमिली की लड़की थी. सिंपल सोबर छरहरी दिखती थी. उसकी लम्बाई मेरे लायक फिट थी उसके बूब्स थोड़े छोटे ३२ के करीब होंगे और पतला छरहरा बदन तीखे नैन-नक्श थे उसके. वो मेरे मन को बहुत भा गई थी. शादी से लौट के मैंने उस रात मीनू के नाम के कई बार मुट्ठ मारी. मै उसको पटाने का बहुत अवसर खोजा करता था वो मेरे घर के सामने से रोज निकलती थी पर हम बात नही कर पाते थे. ऐसा होते होते करीबन १ साल बीत गया.

एक बार मै दिल्ली जा रहा था गोंडवाना एक्सप्रेस से. स्टेशन पर गाड़ी आने मैं कुछ देर बाकी थी शादियों का सीज़न चल रहा था काफ़ी भीड़ थी. मेरा रिज़र्वेशन स्लीपर में था. तभी मुझे मीनू दिखी, साथ में उसका भाई और सभी फॅमिली मेम्बेर्स भी थे। उसके भाई से मेरी जान पहचान थी सो हम दोनों बात करने लगे. मैंने पूछा "कहा जा रहे हो" तो बोले "मौसी के यहां शादी है दिल्ली मैं वहीँ जा रहे है".

मुझ से पूछा " देव जी आप कहा जा रहे हो"

मैंने कहा " दिल्ली जा रहा हूँ थोड़ा काम है और एक दोस्त की शादी भी अटेण्ड करनी है"

इतने में ट्रेन आने का अनौंसमेंट हो चुका था। उनके साथ बहुत सामान था, मेरे साथ सिर्फ़ एक एयर बैग था उन्होंने मेरे से सामान गाड़ी में चढाने की रेकुएस्ट करी गाड़ी प्लेटफोर्म पर आ चुकी थी यात्री इधर उधर अपनी सीट तलाशने के लिए बेतहाशा भाग रहे थे बहुत भीड़ थी. मीनू के भाई ने बताया की इसी कोच में चढना है तो हम फटाफट उनका सामान चढाने मैं बीजी हो गए. उनका सामान गाड़ी के अंदर करके उनकी सीट्स पर सामान एडजस्ट करने लगा मैंने अपना बैग भी उन्ही की सीट पर रख दिया था मुझे अपनी सीट पर जाने की कोई हड़बड़ी नही थी क्योंकि बीना जंक्शन तक तो गोंडवाना एक्सप्रेस मैं अपनी सीट का रिज़र्वेशन तो भूल जाना ही बेहतर होता है. क्योंकि डेली पैसेन्जर्स भी बहुत ट्रेवल करते है इस ट्रेन से सो मै उनका सामान एडजस्ट करता रहा.

गाड़ी सागर स्टेशन से रवाना हो चुकी थी. मै पसीने मैं तरबतर हो गया था.. अब तक गाड़ी ने अच्छी खासी स्पीड पकड़ ली थी. मीनू की पूरी फॅमिली सेट हो चुकी थी और उनका सामान भी. गाड़ी बीना 9 बजे रात को पहुचती थी और फिर वहा से दूसरी गोंडवाना मैं जुड़ कर दिल्ली जाती थी. इसलिए बीना मैं भीड़ कम हो जाती है. मै सबका सामान सेट करके थोड़ा चैन की साँस लेने कम्पार्ट्मेन्ट के गेट पर आ गया फिर साथ खड़े एक मुसाफिर से पूछा "यह कौन सा कोच है " उसने घमंडी सा रिप्लाई करते हुए कहा एस ४.... तुम्हें कौन सो छाने ( आपको कौन सा कोच चाहिए)" "अरे गुरु जोई चाने थो ....... जौन मैं हम ठाडे है ..... (बुन्देलखंडी) (यही चाहिए था जिसमे हम खड़े है)"

मैंने अपनी टिकेट पर सीट नम्बर और कोच देखा तो यही कोच था जिसमे मीनू थी बस मेरी बर्थ गेट के बगल वाली सबसे ऊपर की बर्थ थी. बीना मैं मैंने हल्का सा नाश्ता किया और घूमने फिरने लगा. मुझे अपने बैग का बिल्कुल भी ख्याल नही था. बिना से गाड़ी चली तो ठण्ड थोडी बढ गई थी मुझे अपने बैग का ख्याल आया. मै उनकी सीट के पास गया तो मैंने "पूछा मेरा बैग कहा रख दिया." मीनू की कजिन बोली " आप यहां कोई बैग नही छोड़ गए आप तो हमारा सामान चढवा रहे थे उस समय आपके पास कोई बैग नही था" जबकि मुझे ख्याल था की मैंने बैग मीनू की सीट पर रखा था. वो लोग बोली की आपका बैग सागर मैं ही छूट गया लगता है.

मैंने कहा कोई बात नही. उन्होंने पूछा कि आपकी कौन सी बर्थ है मैंने कहा इसी कोच मैं लास्ट वाली. मीनू की मम्मी बोली "बेटा अब जो हो गया तो हो गया जाने दो ठण्ड बहुत हो रही है ऐसा करो मेरे पास एक कम्बल एक्स्ट्रा है वो तुम ले लो"

मैंने कहा "जी कोई बात नहीं मै मैनेज कर लूँगा"

" ऐसे कैसे मनेज कर लोगे यहां कोई मार्केट या घर थोड़े ही किसी का जो तुमको मिल जाएगा ठण्ड बहुत है ले लो" मीनू की मम्मी ने कहा.

"मुझे नींद वैसे भी नहीं आना है रात तो ऐसे ही आंखों मैं ही कट जायेगी.." मैंने मीनू की ऑर देखते हुए कहा. मीनू बुरा सा मुह बनके दूसरे तरफ़ देखने लगी.

ट्रेन अपनी पूरी रफ्तार पर दौडी जा रही थी. मुझे ठण्ड भी लग रही थी तभी मीनू की मम्मी ने कम्बल निकालना शुरू किया तो मीनू ने पहली बार बोला. रुको मम्मी मै अपना कम्बल दे देती हूँ और मै वो वाला ओढ लूंगी. मीनू ने अपना कम्बल और बिछा हुआ चादर दोनों दे दी..... मुझे बिन मांगे मुराद मिल गई क्योंकि मीनू के शरीर की खुशबू उस कम्बल और चादर मैं समां चुकी थी. मै फटाफट वो कम्बल लेकर अपनी सीट पर आ गया
... मुझे नींद तो आने वाली नहीं थी आँखों मैं मीनू की मुनिया और उसका चेहरा घूम रहा था. मै मीनू के कम्बल और चादर को सूंघ रहा था उसमे से काफी अच्छी सुंगंध आ रही थी. मैं मीनू का बदन अपने शरीर से लिपटा हुआ महसूस करने लगा और उसकी कल्पनों मैं खोने लगा.. मीनू और मै एक ही कम्बल मै नंगे लेटे हुए है मै मीनू के बूब्स चूस रहा हूँ और वो मेरे मस्त लौडे को खिला रही है. मेरा लंड मै जवानी आने लगी थी जिसको मै अपने हाथ से सहलाते हुए आँखे बंद किए गोंडवाना एक्सप्रेस की सीट पर लेटा हुआ मीनू के शरीर को महसूस कर रहा था.

जैसे जैसे मेरे लंड मै उत्तेजना बढती जा रही थी वैसे वैसे मै मीनू के शरीर को अपने कम्बल मैं अपने साथ महसूस कर रहा था. इधर ट्रेन अपनी पूरी रफ्तार पर थी मै मीनू के बूब्स प्रेस करते हुए उसके क्लिटोरिस( चूत के दाने) को मसल रहा था और उसके लिप्स और गर्दन पर लिक करता हुआ मीनू के एक-एक निप्प्ल को बारी बारी चूस रहा था.. इधर मीनू भी कह रही थी अह्ह्ह हह सीईईई ओम्म्म मम् बहु्त अच्छा लग रहा है मै बहुत दिन से तुमको चाहती हूँ देव ....... जबसे तुमको देखा है मै रोज तुम्हारे नाम से अपनी चूत को ऊँगली या मोमबत्ती से ...... चोदती हूं ...उम् म ..... आ अ अ अ .... तुम्हारा लंड तुम्हारे जैसा मस्त है उम् म म म बिल्कुल लम्बा चोडा देव .... उम् म म आ अअ अआ जल्दी से मेरी चूत में अपना लन्ड घुसा दो अब सहन नही हो रहा उ मम म आया अ अ अ और मै एक झटके में मीनू की बुर मैं लंड पेल कर धक्के मारने लगा ट्रेन की रफ्तार की तरह के धक्के ... फटाफट जैसे मीनू झड़ रही हो उम् मम् देव ......मेरी बुर र ... सी पेशाब.... निकलने वाली ही तुम्हारे लंड ने मुझे मूता दिया मेरी पहली चुदाई बड़ी जबरदस्त हुई उम् म आ अ अ जैसे ही मीनू झडी मैं भी झड़ने लगा मै भूल गया की मै ट्रेन मै हूँ और सपने मै मीनू को चौद्ते हुए मुट्ठ मार रहा हूँ और मैं भी आ आया.... हा ह मीनू... ऊऊ मजा आ गया मै कब से तुमको चोदना चाहता था कहते हुई झड़ने लगा और बहुत सारा पानी अपने रुमाल मैं निकाल कुछ मीनू के चादर मैं भी गिर गया.

जब मै शांत हुआ तो मेरे होश वापिस आए और मैंने देखा कि मै तो अकेला ट्रेन मै सफर कर रहा हूँ.. शुक्र है सभी साथी यात्री अपनी अपनी बेर्थ्स पर कम्बल ओढ कर सो रहे थी. ठण्ड बहुत तेज़ थी उस पर गेट के पास की बर्थ बहुत ठंडी लगती है अब मुझे पेशाब जाने के लिए उठाना था मै हाफ पेंट में सफर करता हूँ तो मुझे ज्यादा दिक्कत नही हुई..... अब तक रात के १.३० बज चुके थे मै जैसे ही नीचे उतरा तो मुझे लगा जैसे मीनू की सीट से किसी ने मुझे रुकने का संकेत किया हो मीनू की सीट के पास कोच के सभी यात्री गहरी नींद मै सो रहे थे और ट्रेन अभी १ घंटे कही रुकने वाली नही थी. मैंने देखा मीनू हाथ मै कुछ लिए आ रही है.. मेरे पास आकर बोली "बुधू तुम अपना बैग नहीं देख सके मुझे क्या संभालोगे" ठंड मैं ठिठुरते हो ......"

मैंने उसकी बात पर ध्यान नही दिया उसने क्या मेसेज दे दिया मै रिप्लाई दिया " मैं तुम्हारे कम्बल मै तुम्हारी खुशबू लेकर मस्त हो रहा था" मै अपने लंड के पानी से भरा रुमाल अपने हाथ मै लिए था. जिसको देख कर वो बोली "यह क्या है" मैंने कहा " रुमाल है".

"यह गीला क्यों है" मीनू ने पूछा " ऐसे ही... तुम्हारे कारण ... कह कर मैंने टाल दिया......

मीनू ने पूछा "मेरे कारण कैसे......" फिर मुझे ध्यान आया की अभी अभी मीनू ने मुझे कुछ मेसेज दिया है....

मैंने मीनू को गेट के पास सटाया और उसकी आंखों मै देखते हुए उसको कहा मीनू आई लव यू और उसके लिप्स अपने लिप्स मैं भर लिए उसके मम्मे पर और गांड पर हाथ फेरने लगा. मीनू भी मेरा किस का जवाब दे रही थी.....

मै मीनू के दूधों की दरार मै चूसने लगा था और बूब्स को दबा रहा था... मेरा लंड जो आधा बैठा था फ़िर से ताकत भरने लगा और उसके पेट से टकराने लगा.. मीनू मेरे से बोली आई लव यू टू.. इधर कोई देख लेगा जल्दी से इंटर कनेक्ट कोच की और इशारा कर के कहने लगी उस कोच के टॉयलेट मैं चलो ......

हम दोनों टॉयलेट में घुस गए.... टॉयलेट को लाक करते ही मै उसको अपने से लिपटा लिया और पागलों की भाति चूमने लगा.. मीनू मै तुमसे बहुत प्यार करता हूँ और तुमको दिलो जान से चाहता हूँ......

हां! मेरे राजा देव मै भी तुम्हारे बिना पागल हो रही थी..... जानते हो यह प्रोग्राम कैसे बना दिल्ली जाने का .....मेरे आने का मै तुम्हारे घर आई थी मम्मी के साथ तुम्हारी मम्मी और मेरी मम्मी संकट मोचन मन्दिर पर रामायण मंडल की मेंबर है.. तो उन्होंने बताया की देव को परसों दिल्ली जाना ही तो वो नही जा सकती उनके साथ. तब मैंने भी मम्मी को प्रोग्राम बनने को कह दिया मैंने कहा यह कहानी छोड़ो अभी तो मजा लो

मैंने उसको कमोड शीट पर बिठा दिया और उसके पैर से लेकर सर तक कपडों के ऊपर से ही चूसने चूमने लगा..... मैंने उसकी चूत पर हाथ रखा वो "सी ई ईई आई वहां नही वहां कुछ कुछ होता है जब भी तुमको देखती हु मेरी अंदर से पेशाब निकल जाती है वहां नही" ऐसा कहने लगी

मैंने कहा "मुझे विश्वास नही होता मुझे दिखाओ " ऐसा कहकर मै सलवार के ऊपर से उसकी अंदरूनी जांघ और बूब्स पर हाथ से मालिश करने लगा

" हट बेशरम कभी देखते है लड़कियों की ऐसे वो शादी के बाद होता है " मीनू बोली

मैंने मीनू के बूब्स को सहलाते हुई और उसकी अंदरूनी जांघ पर चूमते हुए उसकी चूत की तरफ़ बदने लगा और कहा " ठीक है जैसा तुम कहो पर मै कपड़े के ऊपर से तो चेक कर लूंगा"'' मीनू भी अब गरमाने लगी थी उसकी चूत भी काफ़ी गर्म और गीली होने लगी थी. वो अपने दोनों पैरो को सिकोड़ कर मेरे को चूत तक पहुचने से रोक रही थी... " प्लीज़ वहां नही मैं कंट्रोल नहीं कर पाऊँगी अपने आप, को कुछ हो जायेगा .... मेरी कजिन के भरोसे आई हूं उसको पटा रखा है मैंने। यदि कोई जाग गया तो उसकी भी मुसीबत हो जायेगी प्लीज़ मुझे जाने दो अब..."

मैंने मीनू के दोनों पैर अपनी ताकत से फैलाये और उसकी सलवार की सिलाई को फाड़कर उसकी पिंक पैंटी जो की उसके चूत के रस मैं सराबोर थी अपने मुह में ले लिया... उसकी पैंटी से पेशाब की मिलीजुली स्मेल के साथ उसके पानी का भी स्वाद मिल रहा था.....

मैंने पैंटी के ऊपर से ही उसकी चूत को जोरो से चूसना चालू कर दिया.. मीनू कहे जा रही थी" प्लीज़ नो ! मुझे जाने दो उई मा मैं कंट्रोल खो रही हूं उम् मम मम् मुझे जाने दो.... और.. जोर से चाटो मेरी पेशाब में कुछ हो रहा है बहुत अच्छा लग रहा है मेरे पेट में गुदगुदी हो रही है मीनू के निप्पल भी खड़े हो गए थी क्योंकि उसकी कुर्ती मै हाथ डाल कर उसके मम्मे मसल रहा था मीनू मेरे सर को अपनी चूत पर दबाये जा रही थी ... उम्म मै मीनू की पैन्टी को चूत से साइड में खिसका के उसकी चूत को चूत की लम्बाई में चूस रहा था।

मीनू अपने दोनों पैर टॉयलेट के विण्डो पर टिकाये मुझसे अपनी चूत चटवा रही थी मीनू की बुर बिल्कुल कुंवारी थी मैंने अपनी ऊँगली उसकी बुर मैं घुसेदी बुर बहुत टाइट और गीली थी मीनू हलके हलके से करह रही थी " उम्म्म आआ मर गई" मैं मीनू की बुर को ऊँगली से चोद रहा था और चूत के दाने को चाट और चूस रहा था.. सलवार पहने होने के कारण चूत चाटने मैं बहुत दिक्कत हो रही थी.

मीनू की चूत झड़ने के कगार पर थी'' आ आअ कुछ करो मेरा शरीर अकड़ रहा है पहले ऐसा कभी नही हुआ मेरी पेशाब निकलने वाली ही अपना मुह हटाओ और जोर से चूसो अपनी उंगली और घुसाओ आअ आ . उई माँ आअ अ .... उसकी जवानी का पहला झटका खाकर मेरे मुह को अपने चूत के अमृत से भरने लगी...... मीनू के मम्मे बहुत कड़क और फूल कर ३२ से ३४ होगये मालूम होते थे... इधर मेरी हालत ज्यादा ख़राब थी ... मैंने मीनू को बोला प्लीज़ एक बार इसमे डाल लेने दो मीनू ने कहा ' अभी नही राजा मै तो ख़ुद तड़प रही हूँ तुम्हारी पेशाब अपनी पेशाब मैं घुसवानेको.. उम्म्म सुना ही बहुत मजा आता है और दर्द भी होता है "

मैंने कहा "अपन दोनों के पेशाब के और भी नाम है " "मुझे शर्म आती है वो बोलते हुई" और वो खड़ी होने लगी मै कमोड शीट पर बैठा और अपनी नेक्कर नीचे खिसका दी मेरा हल्लाबी लंड देखकर उसका मुह खुला का खुला रह गया.

"हाय राम... ममम म इतना बड़ा और मोटा..........तो मैंने कभी किसी का नही देखा

मैंने पूछा "किसका देखा है तुमने... बताओ "

मेरे भैया जब भाभी की चुदाई करते है तो मै अपने कमरे से झाँक कर देखती हूँ.. भाभी भइया के इससे अद्धे से भी कम साइज़ के पेशाब में चिल्लाती है फ़िर इस जैसी पेशाब मै तो मेरा क्या हाल करेगी... मै कभी नही घुसवाउंगी"

मैंने कहा अछा "मत घुसवाना, पर अभी तो इसको शांत करो"

"मै कैसे शांत करू" मीनू ने कहा

मैंने कहा "टाइम बरबाद मत करो, जल्दी से इसे हाथ मैं लो और मेरी मुट्ठ मारो" मैंने उसका हाथ पकड़ कर अपने लंड पर लगाया और आगे पीछे करवाया. पहले तो मीनू थोड़ा हिचकी फिर बोली " तुम्हारा लंड बहुत शानदार है मेरी चूत में फ़िर से खुजली होने लगी है.......हीई सीइई मैई इ इक्या करू ओम मम म फ्लिच्क कक्क " एक ही झटके मैं मेरा सुपाडा उसने किसी आइसक्रीम कोण की तरह चूस लिया मै जैसे स्वर्ग में पहुच गया मैंने उसके मुह में धक्के मारे मैंने कहा मेरा पानी निकलने वाला है.

" मेरी चूत फ़िर से गरम हो गई है इसका कुछ करो सी ई इ आअ आ अ ..........." मीनू सिसकारियां भर रही थी मैंने मीनू को फौरन कमोड शीट पर बैठाया और उसकी कुर्ती का कपड़ा उसके मुह मै भर दिया..... जिससे लंड घुसने पर वो चिल्लाये नही मैंने उसको समझाया भी थोड़ा दर्द होगा सहन करना .. मैंने उसकी दोनों टांगें फैली और चूत चाटी दो ऊँगली उसकी चूत मै भी घुसी उसकी चूत बहुत टाइट थी और बहुत गीली लिसलिसी सी गरम थी. मीनू कसमसा रही थी " हीई इ सी ई इ इ इ अब जल्दी करो.. मेरे बदन मैं करोड़ों चीटियाँ घूम रही है मेरी बुर को ना जाने क्या हो गया है" मीनू ने कुर्ती मुह से निकाल कर कहा.

मैंने अपने लन्ड पर बहुत सारा थूक लगाया और कुछ उसकी गीली चूत मै भी लगाया जिससे उसकी चूत के लिसलिसे रस से मेरा थूक मिलकर और चूत को चिकना कर दे..... मैंने लंड हाथ मैं लेकर सुपाडा मीनू की चूत मैं ऊपर नीचे रगडा .. मीनू अपनी गांड उठा कर मेरे लंड का स्वागत कर रही थी अब वो बिना लंड डलवाए नही रह सकती थी

उसने मेरे लन्ड को पकड़ा और अपनी बुर पर टिकाया मैंने पहले थोड़ा सा सुपाडा अंदर कर उसको अंदर बाहर कर एडजस्ट किया.... मुझे ऐसा लग रहा था की मेरे लण्ड को किसी जलते हुए चमड़े के क्लंप मैं कस दिया हो. इतनी टाइट बुर थी मीनू की मैंने थोडी और लंड अंदर पेला मीनू की मुह मै यदि कुर्ती ना घुसाई होती तो पूरे कम्पार्टमेंट के यात्री हमें चुदाई करते हुए पकड़ लेते....

मीनू मेरे मोटे लंड के कारन अपना सिर इधर उधर हिलाकर और अपनी आंखों से आंसू निकाल कर बता रही थी की उसको कितना दर्द हो रहा है........ मैं थोडी देर रुक कर फाटक से एक गहरा और चूत फाड़ धक्का पेला जिससे मीनू की बुर की झिल्ली फटी और लौड़ा उसकी गहराई तक समां गया मीनू की तो हालत ख़राब हो गई थी.. मैंने थोड़ा रुक कर लंड बाहर खींचा तो उसके साथ खून भी बहर आया और फटा फट धक्के मारने लगा. मीनू की टाइट चूत के कारण मेरे गेंदों मै उबाल आना शुरू हो गया था.. मैंने मौके की नजाकत को ताड़ते हुए पहले लंड बाहर निकाला और गहरी साँस लेकर अपनी पोस्शन कंट्रोल करी और मीनू के मुह से कुर्ती हटी और फिर धीरे धीरे पूरा लंड घुसा कर शुरू मै हलके धक्के मारे फ़िर ताबड़ तोड़ धक्के लगाए.

मै अपनी स्पीड गोंडवाना एक्सप्रेस से मिला रहा था..." मीनू की बुर पानी छोड़ने वाली थी क्योंकि उसने अपनी कुर्ती वापिस अपने मुह में डाल ली थी और मीनू की बुर मेरे लौडे को कसने लगी थे मै मीनू के ३२ से ३४ साइज़ हुए मम्मे मसलता हुआ चुदाई कर रहा था.. मीनू बहुत जोरो से झडी तभी मेरे लण्ड ने भी आखिरी सांसे ली तो मैंने मीनू के दोनों मम्मे पूरी ताकत से भीचते हुए अपना लौड़ा मीनू की टाइट बुर मै आखिरी जड़ तक पेल दिया और मीनू की बूर को मैंने पहला वीर्य का स्वाद दिया मीनू भी बहुत खुश हो गई थी. जब साँस थमी तो मैंने लन्ड मीनू की बुर से बाहर निकाल जिससे मीनू की बुर से मेरे वीर्य के साथ मीनू की बुर से जवानी और कुंवारापन का सबूत भी बहकर बाहर आ रहा था.

मैंने मीनू को हटाया और कमोड में पेशाब करी मीनू बड़े गौर से मेरे लंड से पेशाब निकलते देखते रही और एक बार तो उसने मुह भी लगा दिया. उसका पूरा मुह मेरे पेशाब से गीला हो गया कुछ ही उसके मुह में जा पाया मैंने अपना लंड धोया नही उस पर मीनू की बुर का पानी और जवानी की सील लगी रहने दिया और नेक्कर के अंदर किया मीनू की बुर मै सुजन आ गई थी मै इंतज़ार कर रहा था की अब मीनू भी अपनी बुर साफ़ करेगी तो नंगी होगी तो उसने मुझे बाहर जाने को बोला. मै उसकी बात मानकर उसको अपना रुमाल बताकर आ गया. मैंने अपनी घड़ी मै टाइम देखा तो हम लोगो के सवा घंटा गुजर गया था टॉयलेट में... शुक्र है भगवन का कि ठंड के कारण कोई नही जागा था और ट्रेन भी नही रुकी थी. थोडी देर बाद मीनू अपनी बुर पर हा्थ फेरती हुई कुछ लड़खड़ाते हुए बाहर आई मैंने पूछा क्या हाल है जानेमन तुम्हारी बुर के " सुजन आ गई है पर चुदवाने मै बहुत मजा आया फ़िर से चुदवाने का मन कर रहा है

" ये लो यह रूमाल तुम वहां छोड़ आए थे। स फक्स....इसमे यह क्या लगा है लिसलिसा" यह वोही रुमाल था जिसमे मैंने मीनू के नाम की मुट्ठ मारी थी अपनी सीट पर लेते हुए वोही मुझे देने लगी. "इसमे वोही लिसलिसा है तो अभी तुम्हारी मुनिया मै मेरे लंड ने उडेला है.... और तुम क्या लिए हो" मैंने मीनू को कहा... उसने पहले सूंघा फूले कहने लगी " ये मेरी पैंटी ही... ख़राब हो गई थी तो मैंने निकाल ली.. और तुम्हारा रुमाल मै ले जा रही हूँ इसे अपने साथ रखूँगी और तुम्हारे पानी का स्वाद लेकर इसे सूंघकर सो जाउंगी.. तुम दिल्ली में कहां रुकोगे.. और किस काम से जा रहे हो" मीनू ने मेरे से पूछा . तुम अपनी पैंटी मुझे दो मैंने मीनू से कहा फिर बताउंगा कि मैं कहां और क्यों जा रहा हूँ. पहले तो मीनू मुझे घुड़की "तुम क्या करोगे मेरी गन्दी पैंटी का" मैंने कहा " वोही जो तुम मेरे रुमाल के साथ करोगी और मै तुम्हारी पैंटी अपने लंड पर लपेट कर मुट्ठ भी मारूंगा" उसने मेरे को चुम्मा देते हुए कहा "पागल" और अपनी पैंटी मुझे दे दी मैंने वहां जहां उसकी बुर रहती है उसको अपनी नाक से लगाया और जीभ से चाटा तो मीनू शर्मा गई

मैंने मीनू को बताया की मुझे दिल्ली में थोड़ा काम है और एक दोस्त की शादी भी है इतना सुनकर वो कुछ आश्वस्त हुई. मैंने कहा तुम मेरा सेल नम्बर ले लो मेरे को फ़ोन कर लेना मै बता दूँगा की कहा पर रुकुंगा और हम कैसे और कब मिलेंगे यह भी बता देंगे.

मीनू मेरा रुमाल लेकर अपनी सीट पर आ गई और मै अपनी सीट पर. अब मेरा बैग भी आ गया था सो मैंने बैग मै से एयर पिल्लो निकाल और अपने सिराहने रख कर मीनू को याद करने लगा मेरा मेरा लंड फ़िर से खडा होने लगा सो मैंने सीट पर लेटकर मीनू की पैंटी सूंघने लगा उसमे से मीनू की पेशाब और उसके पानी की स्मेल आ रही थी. उस स्मेल ने कमाल ही कर दिया मेरा लंड फंफनाकर बहुत कड़क हो गया मैंने मीनू की पैंटी का वो हिस्सा जो कि उसकी चूत से चिपका रहता था मैंने फाड़ लिया और बाकी की पैंटी लेटे लेटे ही लंड पर लपेट ली नेक्कर के अंदर मैंने मीनू को सपने में चोदते हुए और उसकी बुर की खुसबू सूंघते हुए उसकी पेशाब भरी पैंटी को चाटते हुए मुठ मारने लगा मैंने अपना सारा पानी मीनू की फटी हुई पैंटी और अपनी चड्डी मै निकाल दिया ३ बार झड़ने के कारण पता ही नही चला की कब मै सो गया"

सुबह मुझे एहसास हुआ की कोई मुझे जगा रहा है.. तो मैंने आँख खोलते हुए पुछा कौन है गाड़ी कौन से स्टेशन पर खड़ी है .... मुझे जगाने वाला मेरा साला मीनू का भाई था बोला " देव जी उठिए निजामुद्दीन पर गाड़ी खड़ी है पिछले १५ मिनिट से सभी आपने घर पहुच गए आप अभी तक सोये हुए हूँ" मै फटाफट उठा और अपना सामान बटोरा वैसे ही हाथ में लिया और प्लेटफोर्म पर उतर आया. वहा सबसे पहले मेरी नज़र मेरी नई चुदैल जानेमन मीनू पर पड़ी वो बिल्कुल फ्रेश लग रही थी. उसके चेहरे से कतई ऐसा नही लग रहा थी कल रात को मैंने इसी ट्रेन मै मीनू की बुर का अपने हल्लाबी लंड से उदघाटन किया था और उसकी सील तोडी थी

प्लेटफॉर्म पर बहुत ठण्ड थी। सुनहरी धूप खिली थी मै टीशर्ट और नेक्कर मै खड़ा था.... मैंने मीनू का कम्बल और चादर तह कर के उनको सौंपे और उनका धन्यवाद दिया मै अपने एयर पिल्लो की हवा ऐसे निकाल रहा था जैसे मीनू के दूध दबा रहा हूँ और यह मीनू को और उसकी कजिन को दिखा भी रहा था.

मैंने उन लोगों से पूछा कि आप कहा जायेंगे मीनू का भाई बोला हमको सरोजिनी नगर जाना है और आपको कहा जाना है. मुझे भी सरोजिनी नगर जाना था वहा पर मेरे दोस्त की शादी है... मैंने उन लोगों को जवाब दिया.
मैंने कहा मेरे साथ चलिए.... मुझे लेने गाड़ी आई होगी बाहर.....वो लोग बोले नही नहीं आप चलिए हम बहुत सारे लोग है और इतना सारा समान है, आप क्यों तकलीफ करते है.....

मैंने कहा इसमे तकलीफ जैसे कोई बात नही हम आखिर एक ही मोहल्ले के लोग है इसमे तकलीफ क्यों और किसे होने लगी फ़िर गाड़ी में अकेला ही तो जाउंगा यह मुझे अच्छा नही लगेगा. मीनू की कजिन धीमे से बोली रात की मेहनत सुबह रंग ला रही है... और मुझे मीनू को देखकर हलके से मुसकुरा पड़ी. हम सभी बाहर आए तो देखा कि एक टाटा सूमो पर मेरे नाम की स्लिप लगी हुई थी मैंने मीनू के भाई और मम्मी से कहा की देखिये किस्मत से मेरे दोस्त ने भी बड़ी गाड़ी भेजी है. इसमे हम सब और पूरा सामान भी आ जाएगा.

गाड़ी में सारा सामान लोड कर सभी को बैठा कर गाड़ी रिंग रोड पर निकलते ही मैंने गाड़ी साइड मै रुकवाई और एक पी सी ओ में घुस गया वहा से अपने दोस्त को फ़ोन किया कि यार मेरे लिए एक रूम का अलग अरेंजमेन्ट हो सकता है क्या... उसने पूछा क्यों.... मैंने कहा देखा तेरे लौडे का इन्तेजाम तो कल हो गया तू कल ही चूत मारेगा मै अपने लिए अपनी चूत का इन्तेजाम सागर से ही कर के लाया हूँ... रात में ट्रेन में मारी थी चूत पर मजा नही आया। तसल्ली से मारना चाहता हूँ.

मेरा दोस्त बोला " देव भाई तुमसे तो कोई लड़की पटती नही थी यह एक ही रात में तुमने कैसे तीर मार लिए और तुमने उसे चोद भी डाला!

मैंने कहा बोल तू कर सकता है तो ठीक नही तो मै होटल जा रहा हूं। मुझे मेरे दोस्त ने आश्वस्त करा दिया कि वो ऐसा इन्तेजाम कर देगा.

मै फ़ोन का बिल देकर गाड़ी मै बैठा और इंतज़ार कराने के लिए सभी को सॉरी बोला और ड्राईवर को चलने का हुकुम दिया ...मैंने पूछा आप लोग सरोजिनी नगर मै किसके यहां जायेंगे...मीनू की मम्मी बोली " बेटा मेरी बहिन के लड़के की शादी है... कल की मिस्टर कपूर... रोहन कपूर.....

" ओह फ़िर तो मजा ही आ गया भाई" मै उछलता हुआ बोला.. सब मेरे को आश्चर्य भरी निगाहों से देखने लगे सो मै आगे बोला " वो.. वो.. क्या है की मुझे भी कपूर साहब के बेटे यानि सुमित की शादी मै जाना है..

बातों बातों में कब सुमित का घर आ गया पता ही नही चला.... पर मै सुमित से आँख नही मिला पा रहा था.. जब सब घर के अंदर चले गए तो मैंने ड्राईवर को रुकने को बोला और अपना बैग गाड़ी मै छोड़ कर सुमित को बुलाने उसके घर मै गया.... सुमित आकर मेरे से लिपट गया.. बहुत खुश था सुमित पर मै उससे आँख नही मिला पा रहा था मैंने सुमित को एक तरफ़ ले जाकर बोला " देख यारा बुरा मत मानियो .. तुम्हारे यहां मेहमान बहुत है मै ऐसा करता हूँ कि मै और सुधीर मेरा एक और दोस्त दोनों होटल मै रुक जाते है.."

मेरा इतना कहते ही सुमीत के चेहरे के भाव बदल गए.. सुमित ने कहा " देख भाई देव मै जानता हूँ की तुम होटल क्यों जा रहे हो यार कोई बात नही तुमने रेखा (मीनू की कजिन) को चोद दिया तो क्या हुआ.. इससे कोई फर्क नही पड़ता.. यदि तुम मीनू को भी चोद देते तो इसमे कोई दिक्कत नही थी मै भी उसको चोदना चाहता था पर मौका नही मिला या मेरी हिम्मत नही हुई.. इसे दिल पे मत ले यार" मौज कर यारा मैंने तेरे लिए स्पेशल रूम का अरेंजमेन्ट किया है वो भी तुम्हारी डार्लिंग के साथ वाले रूम में।

यह सुनकर मेरी जान में जान आई. मै सुमित को क्लीयर कर देना चाहता था की मै रेखा नही मीनू को चोदना चाहता हूँ." सो मैंने कहा मैंने मीनू को चोदा है ट्रेन में.... और उसको ही तसल्ली से चोदना चाहता हूं..

सुमित बोला " सेक्सी तो रेखा थी पर तुमने मीनू को कैसे चोद लिया.. वो बधाई हो माई बोय...........तभी मीनू थोड़ा लंगडा के चल रही थी. तुमने तो ऑफिस में अपनी मैडम को भी तगड़ा चोदा था जबकि वो शादी शुदा थी वो तो २ दिन चल फ़िर भी नही सकी थी"

" तुम दोनों दरवाजे पर ही बातें करते रहोगे क्या? सुमित इसे इसके कमरे में पहुंचा दो .. कैसे हो देव बेटा" कहते हुए सुमित के पापा आ रहे थे.....

मैंने उनके पैर छुए और उनसे थोडी बातें करी. फ़िर सुमीत मेरे को अपने रूम मैं ले गया.. सुमीत के पिता बहुत बड़े बिज़नस मैंन थे। बहुत बड़ा बंगला था उनका सुमीत ने मुझे सेकंड फ़लूर पर जहा सिरफ़ ३ ही कमरे थे और मीनू वगैरह भी वहीं रुके थे रूम फिक्स किए थे.. रूम बहुत शानदार था एक डबल बेड, टी वी, वी सी डी प्लेयर, फ़ोन सब कुछ था।

सुमित बोला " क्यों देव कैसा लगा मेरा इन्तेजाम तुम्हारी चूत भी तुम्हारे बगल में है और एक खास बात बताऊ मैं- मीनू की बाथरूम तुम्हारी बाथरूम से अटैच्ड है बीच में दरवाजा है आओ मैं तुमको दिखा दू उसने मेरे को वो दूर दिखा दिया और कैसे खुलता है वो भी दिखा दिया मैं वहां से मीनू के बाथरूम मैं पहुच सकता था और वहां से उसके रूम मे. अच्छा चल तैयार होजा और फटाफट नीचे आजा साथ नाश्ता करेंगे ..

मैं सुमित को बोला " सुमित तो मीनू की चूत की खुशबू लेना चाहेगा ?"

सुमित ने कहा कैसे मैंने मीनू की पैंटी का वो फटा हिस्सा उसको दिखाया और उसको सूंघने को दे दिया.. मैं और सुमित पहले भी कई लड़कियां साथ मिलकर चोद चुके थे उसको चूत की स्मेल के बारे में पता था बहुत अच्छी है रे देव मीनू की बुर तो मैं तो उसकी बुर के नाम पर मुट्ठ ही मारता रह गया पर तुने मेरे लन्ड का बदला ले लिया.. यह सब बातें बात बाथरूम में ही हो रही थी... सुमित मेरे रूम से चला गया

घर में काफ़ी हो हल्ला हो रहा था सो मैंने रूम लाक करके टीवी ओं कर दिया और नंगा होकर फ्रेश होने और नहाने बाथरूम मैं घुस गया. बढ़िया गर्म पानी से नहाने लगा तभी मुझे दीवार पर कुछ टकराने की आवाज आई। मैंने शोवेर बंद किया तो उस तरफ़ मीनू नहा रही लगता महसूस हो रही थी.... मैंने …धीरे से दरवाजा खिसकाया जो की बिना किसी आवाज के सरकता था तो देखा एक बिल्कुल जवान नंगा जिस्म शोवेर में मेरी तरफ़ पीठ किया अपनी बुर मैं साबुन लगा रहा था मैं भी मादरजात नंगा था मेरे लंड को चूत का ठिकाना का एहसास होते ही उछाल भरने लगा मैंने आव देखा ना ताव सीधा जाकर उसके मुह पर हाथ रखा जिससे वो डरकर ना चिल्ला पाए और उसकी गांड के बीच मैं अपना हल्लाबी लौदा टिकते हुए उसकी पीठ से चिपक गया.

मेरी पकड़ जबरदस्त थी इसलिए वो हिल भी नही पाई मैंने शोवेर के नीचे ही उसके कानो में कहा कहो जानेमन अब क्या इरादा है चलो एक बार फिर से चुदाई हो जाए और मैं उसकी चूत पर हा्थ फिरने लगा उसने अपनी बुर मैं साबुन घुसा रखा था वो साबुन से अपनी चूत चोद रही थी मैंने कहा यह जगह साबुन रखने की नही लन्ड रखवाने की है और मैं उसके चूत के दाने को मसलने लगा.

पहले तो उसने टाँगे सिकोडी पर दाने को मसलने से वो गरमा गई थी उसने अपनी टाँगे ढीले छोड़ दी मैंने अभी तक उसका मुह ताकत से बंद कर रखा था मैंने कुछ देर इसकी पोसिशन मैं उसकी बुर का दाना मसला और फ़िर मैंने अपनी बीच वाली ऊँगली उसकी बुर के हौले मैं घुसा दी ... बहुत गरम और टाइट चूत थी.. मैंने अपनी ऊँगली से उसकी बुर को चोदने लगा था, वो मस्ताने लगी थी थी और उसकी बुर पनियाने लगी वो हिल रही थी अपनी गांड भी जोरो से हिला रही थी।

मैंने अपनी ऊँगली को उसकी बुर मैं तेज़ी से पेलना शुरू कर दिया यानि की स्पीड बड़ा दी इधर मेरा हल्लाबी लौड़ा जो की उसकी मदमाती गांड मैं फसा हुआ था फनफना रहा था उसकी भी बुर गरमा गई थी.. तभी उसने अपने एक हाथ मेरी उस हथेली पर रखा जिससे मैं उसकी बुर को चोद रहा था फ़िर उसने अपना हाथ मेरे लौडे को छूने के लिए नीचे लगाया वो सिर्फ़ मेरे सुपाडे को ही टच कर पाई वो छटपटा रही थी

बहुत गरम और टाइट चूत थी.. तभी वो अपने दोनों हाथो से मेरा हाथ अपने मुह से हटाने की नाकाम कोशिश करने लगी. मुझे उसकी यह हरकत ठीक नही लगी तो मै उसे बाथरूम से खीच कर अपने बेडरूम मै ले आया और उसको उल्टा ही बेड पर पटक दिया जैसे ही वो पलटी मेरे होश फ़ाखता हो गए वो रेखा थी...

मैंने उसको चुप रहने का इशारा किया और अपने टीवी की आवाज थोडी और बढा दी। रेखा का बदन बहुत सेक्सी था उसके कड़क बिल्कुल गोलाकार ३६ साइज़ के मम्मे सुराहीदार गर्दन, २ इंच गहरी नाभि हल्का सा सांवला रंग। रेखा की चूत डबलरोटी की तरह फूली हुई थी रेखा ने अपनी झांटे बड़ी ही कुशलता से सजा रखी थी मै तो रेखा को नंगी देख कर बेकाबू हो रहा था

रेखा अपनी चूत दोनों हाथों से ढक रही थी और मेरे से कहने लगी प्लीज़ मुझे जाने दो .. मीनू नहाकर आजायेगी तो मुझे दिक्कत हो जायेगी.. मैंने पूछा तुम्हारा रूम अंदर से तो लाक है बा.. बोली हां है मैंने कहा तो फ़िर क्या फिकर तुम जैसे सेक्सी लड़की को नहाने मै टाइम तो लगेगा ही. रेखा तुम बहुत सेक्सी और खूबुसूरत और तुम्हारी चूत तो बहुत गजब की है इसमे जबरदस्त रस भरा हुआ है मुझे यह रस पिला दो प्लीज़ और मै रेखा के ऊपर टूट पड़ा।

रेखा के होंठ बहुत ही रस भरे थे मैंने उसके होंठों को अपने ओठों में कस लिए और उसके लिप्स को चूसने लगा मै एक हाथ से रेखा की मस्त जवानी के मम्मे भी मसल रहा था और अपना लौड़ा उसकी बुर के ऊपर टिका कर रगड़ रहा था पहले तो रेखा छटपटाती रही पर जैसे ही मैंने उसके शरीर पर अपने शरीर के हिस्सों का दबाब बढाया तो वो भी कुछ ढीली पड़ने लगी. अब रेखा ने अपनी चूत से अपने हाथ हटा लिए थे मैंने रेखा के शरीर को सहलाना शुरू किया मै उसकी अंदरूनी जांघों और चूत पर ज्यादा ध्यान दे रहा था.

रेखा भी अब जवाब देने लगी थी और सिसियानी लगी थी रेखा का बदन बड़ा ही गुदाज़ बदन था और ऐसे ही फुद्दी वाली उसी बुर थी मै अब रेखा के निप्प्ल को चूसने के लिए उसके होंठों को चूमते और चाटते हुए नीचे मम्मो की घाटी की ओर चल पड़ा रेखा बहुत जोरो से सिसियाने लगी थी.. ...... मैंने जैसे ही उसके मस्त मामो की सहलाना और उनके किनारों से चूसना चालू किया रेखा छटपटाने लगी मै एक निप्प्ल हाथ से मसल रहा था और दूसरा नीपल की ओर अपनी जीभ ले जा रहा था

रेखा को रेखा को भी अब मजा आने लगा था उसने नीचे हाथ डाल कर मेरा हल्लाब लौड़ा पकड़ लिया और बोली हाय देव मीनू की बुर कितनी खुशनसीब है जिसको तुम्हारे लौडे जैसा चोदु लवर मिला कल रात में ट्रेन में तुमने उसकी बुर के चीथड़े उड़ा दिए मैंने देखा मीनू लंगडाकर चल रही थी

मैंने तुम दोनों की चुदाई के सपने देखते हुए ३ बार अपनी चूत ऊँगली से झाड़ डाली। हय राजा! बहुत मस्त लौड़ा है...

मैंने कहा रेखा तुम्हारी जवानी में तो आग है तुमहरा बदन बहुत गुदाज और सुंदर सेक्सी है तुम्हारी पाव रोटी जैसे फूली चूत मुझे बहुत अच्छी लगती है और मै तेजी से उसके निप्प्ल चूसने लगा और एक हाथ से उसकी चूत को नीबू की तरह मसलने लगा रेखा बहुत गरमा गई थी रेखा कहने लगी अब कंट्रोल नही होता अपना लौड़ा मेरी बुर में घुसा दो, फाड़ दो मेरी बुर, बहुत खुजली हो रही है, तुम्हारा लन्ड जो भी लड़की एक बार देख लेगी बिना चुदवाए नही रह सकती.. और जिसने एक बार चुदवा लिया उसके तो कहने ही क्या वो हमेशा अपनी चूत का दरवाजा तुम्हारे लौडे के लिए खोले रखेगी

मुझे जब मीनू ने तुम्हारे लौडे के पानी वाला रुमाल सुंघाया तो मेरी चूत ने अपने आप पानी छोड़ दिया मै समझ गई थी कि तुम्हारा लौड़ा तुम्हारे जैसा ही हल्लाबी होगा जो मेरी बुर की जी भर कर चुदाई करेगा और खुजली मिटाएगा पर यह नही जानती थी कुछ ही घंटो में मुझे मेरी मुराद पूरी होने का मौका मिल जायेगा...हाय अब सहन नही हो रहा जल्दी से अपना लौड़ा मेरी बुर में पेलो.......

मैं रेखा के माम्मे जबरदस्त तरीके से चूस रहा था और रेखा का तना चूत का दाना मसल रहा था रेखा की चूत बहुत पनियाई हुई थी रेखा बहुत चुदासी हो रही थी रेखा की बुर पर करीने से काटी गई बेल बूटेदार झांटें बहुत सुंदर लग रही थी रेखा की पाव रोटी पिचक और फूल रही थी ऐसी बुर को मै पुट्टी वाली बुर कहता हूँ इसको चूसने और चोदने में बहुत मजा आता है। मै रेखा की बुर को उसकी लम्बाई मै कुरेद रहा था और बीच बीच मै एक ऊँगली उसकी बुर मै घुसा कर ऊँगली से बुर भी चोद देता रेखा की बुर मै लिसलिसा सा पानी था मैंने ऊँगली बाहर निकाल कर सूंघी और चाट ली बहुत ही बढ़िया खुशबू थी और टेस्ट तो पूछो ही मत

मेरी चूत के पानी की प्यासी जीभ रेखा की बुर को चूसने के लिए तड़प उठी मैंने रेखा के पैर के अंगूठे से चूसना शुरू किया और उसकी अंदरूनी जांघ तक चूसते चूसते पहुच गया मै रेखा की काली सावली पाव रोटी जैसी पुट्टी वाली बुर के आस पास अपनी जीभ फिरने लगा वह जो उसका पानी लगा हुआ था उसको चाटने में बहुत मजा आ रहा था रेखा से रहा नही जा रहा था.. हाय देव यह क्या हो रहा ही मेरे को ऐसा पहले कभी नही हुआ। हाय मेरी बुर को चूसो इसे चबा जाओ इसे खा जाओ रेखा ने मेरा सर पकड़ कर अपनी बुर पर लगा दिया उसकी पुत्ती वाली बुर को वो अपनी गांड उठाकर मेरे मुह पर रगड़ रही थी

मैंने रेखा की दोनों टांगे फैलाई और उसकी बुर पर किस किया। सी हाई मर गैईईई आया ऐसा कह रही थी फ़िर मैंने रेखा की पाव रोटी को उंगलियों से खोला और जीभ से जबरदस्त चाटनी शुरू कर दी ऊऊम्म्म्म हीईई सीईई बहुत अच्छा लग रहा है देव उम्म्म्म और चूसो और चाटो, अपनी जीभ पूरी घुमा दो, पहले किसी ने ऐसा मजा नही दिया ओम्म्म मेरी चूत झरने वाली है ई अईई जल्दी से कुछ करो। मैंने अपनी जीभ की रफ़्तार बड़ा दी

रेखा अपनी दोनों टांगो से मेरे सर को दबा लिया मैंने अपनी जीभ रेखा की गरम और लिसलिसी बुर की गुफा में घुसा कर जैसे ही गोल गोल घुमाया अरे यार यह क्या कर दिया मेरी बुर तो पानी छोड़ रही है, और जोर से चू्सो और पिच पिच कर के उसकी बुर ने तेज़ी से पुचकारी मारना चालु कर दिया मै तेज़ी से जीभ चलता हुआ उसका पानी पी गया और चूत का दाना फ़िर से अपनी जीभ में भर लिया रेखा मेरा लंड को प्यार करना चाहती थी सो उसने मेरे कहा तुम अपना लौड़ा मेरी ओर करो हम दोनों ६९ में हो गए

रेखा मेरा लौड़ा बहुत तेज़ी से और अच्छे से चूस रही थी ऐसा लग रहा था की रेखा पहली बार नही चुदवा रही वो पहले भी चुदवा चुकी थी मै रेखा की बुर के दाने को तेज़ी से चूस रहा था रेखा मेरे नीचे थी और मेरा लौड़ा चूस रही थी मै जितना प्रेशर उसकी बुर पर अपनी जीभ से डालता उतनी ही प्रेशर से रेखा भी मेरे लौडे को चूसती मुझे ऐसा लग रहा था की मैंने अपना लंड यदि जल्दी रेखा के मुह से न निकाला तो यह झड़ जाएगा मै रेखा के मुह से लंड निकाल कर रेखा की बुर को और गहराई से चूसने लगा।

रेखा फ़िर से तैयार थी.. हाय मेरे चोदु राजा आज लगता है मेरी बुर की खुजली पूरी तरह से शांत होगी। मेरी पाव रोटी में कई लौडे अपने जान गवा चुके है घुसते ही दम तोड़ देते है। आज तुम मेरी बुर की जान निकल दो मेरे राजा..... मैंने रेखा की गांड के नीचे तकिया लगे उसकी पाव रोटी जैसे पुत्ती वाली बुर जैसे घमंड मै और फूल गई उस गुदाज पुत्ती वाली बुर से लिसलिसा सा कुछ निकल रहा था मुझे सहन नही हुआ तो मैंने फ़िर से अपनी जीभ उसकी बुर से लगा दी.. अरे तुम भी डर रहे हो क्या मेरी पाव रोटी में दम तोड़ने से ? सी हीईई कोई तो मेरी बुर की खुजली शांत कर दे मैंने अपना लौड़ा उसकी बुर पर रखा और थोड़ा उसे क्लिटोरिस से बुर के एंड तक रगडा साथ में मै उसके माम्मे बुरी तरह से रगड़ मसल रहा था रेखा अपनी गांड उठा उठा कर मेरे लन्ड को अपनी बुर मै घुसाने के लिए तड़प उठी मेरे राजा मत तड़पाओ मै मीनू नही रेखा हूँ मै चूत की खुजली से मर जाऊंगी मेरी बुर को चोदो… फाड़ो…

उसने मेरा लन्ड पकड़ा और अपनी बुर के छेद पर टिका लिया और थोडी गांड उठाई तो पुक्क की आवाज के साथ सुपाडा उसकी बुर में घुस गया सुपाडा का गुदाज बुर में घुसना और रेखा के मुह से दर्द की कराह निकलना शुरू हो गई। उई मीनू मेरी बुर में पहली बार किसी ने जलता हुआ लोहा डाला। हाय मेरी बुर चिर गई, फ़ट गई, कोई तो बचा ले मुझे, बहुत मजा आ रहा था मैंने रेखा से कहा रेखा जानेमन पुट्टी वाली गुदाज बुर बहुत कम औरतों को नसीब होती है इनको बड़ी तसल्ली से चुदवाना चाहिए। तुम्हारी चूत की तो मै आज बैन्ड बजा दूँगा

और मैंने रेखा के दोनों मम्मे अपने हाथ में लिए और अपना होंठ उसके होंट से चिपका दिया और पूरा लन्ड एक ही झटके में पेलने के लिए जोरदार धक्का मारा एक झटके में रेखा की बुर की दीवारों से रगड़ खाता हुआ मेरा लंड आधी से ज्यादा रेखा की पाव रोटी वाली बुर मै धस चुका था

मै कुछ देर रुका और लन्ड बाहर खीचा सुपाडा को बुर में रहने दिया और फिर से बुर फाड़ धक्का लगाया। इस बार मेरा लन्ड रेखा की बुर की गहराई में जाकर धस गया मुझे ऐसा लग रहा था जैसे किसी गरम मक्खन वाली किसी चीज को मेरे लंड पर बहुत कस कर बाँध दिया हो. उसकी बुर बहुत लिसलिसी और गरम थी मै रेखा को हलके हलके धक्के देकर चोदने लगा रेखा को अब मजा आ रहा था

वो हाय! सी! राजा औरर मारो, यह बुर तुम्हारे लिए है मेरी बुर को चोदने के इनाम में मै तुम्हारी मीनू के साथ सुहागरात मनवाऊंगी। बहुत मजा आ रहा है पहले किसी ने ऐसे नही चोदा, चोदते रहो, मुझे लगता है कि तुम्हारा लन्ड मेरे पेट से भी आगे तक घुसा हुआ है मेरी चूत की तो आज बैन्ड बज गई। अरे देखो सालो ऐसे चुदवाई और चोदी जाती है चूत उम्म्म मेरे राजा बहुत मजा आ रहा ही उई मा मेरी पेट में खलबली हो रही है यह मैं तो झरने वाली हूँ मैं जाने वाली हूँ सो मैंने अपनी स्पीड बड़ा दी रेखा ने मेरे से कहा देव तुम लेटो मुझे तुम्हारे लौडे की सवारी करने दो मै तुंरत लेट गया रेखा ने लौड़ा को ठिकाने पर रखा और ठप्प से मेरे लौडे पर बैठ गई और फटाफट उचकने लगी रेखा के ३६ साइज़ के मम्मे हवा में उछाल मार रहे थे। रेखा बहुत तेजी से झड़ी पर मै अभी नही झरने वाला था क्योंकि पीछे ६-८ घंटो में ३ बार झर चुका था सो मैंने रेखा को कुतिया बनाया और बहुत बेरहमी से चोदा. रेखा कहने लगी देव बहुत देरी हो जायेगी जल्दी से खाली करो अपना लौड़ा मेरी बुर। मैं फ़िर मैंने और तेज़ी से धक्के मारे और रेखा की बुर की गहराई में झड़ गया रेखा ने मेरा लौड़ा चाट कर साफ़ किया और फ़िर चुदवाने के वादे के साथ विदा हो गई ....

मैंने दिल्ली में सुमित के घर पर ही सुमित की सुहाग रात वाले कमरे में मीनू के साथ भी सुहाग रात मनाई और रेखा और मीनू दोनों को चोदा पर यह सब बाद में